खेती-किसानी: सोयाबीन में रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट का खतरा, खेतों में पहुंची कृषि वैज्ञानिकों की टीम
हरदा। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत कृषि अधिकारियों एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की टीम ने हंडिया, जुगारिया, अमागांवकला, उड़ा और आलमपुर क्षेत्र के खेतों का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान सोयाबीन फसल में रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट रोग के लक्षण पाए गए। टीम ने किसानों को रोग की पहचान और बचाव के उपायों की जानकारी दी।
टीम ने किसानों को दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत अरहर प्रदर्शन, कस्टम हायरिंग सेंटर, सोयाबीन प्रदर्शन, रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट मिशन और प्राकृतिक खेती से संबंधित योजनाओं की जानकारी भी दी।
ये दिखाई दें तो रहें सतर्क
वैज्ञानिकों के अनुसार सोयाबीन में पत्तियों का पीलापन, पौधों का मुरझाना और पानी में उबले जैसे पीले धब्बे रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। शुरुआती अवस्था में फसल की निगरानी और उचित प्रबंधन जरूरी है।
रोकथाम के लिए सुझाव
रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुसार पायराक्लोस्ट्रोबिन के साथ इपॉक्सीकोनाजोल 300 एमएल/एकड़ अथवा फ्लूक्सापायरोक्साड के साथ पायराक्लोस्ट्रोबिन 120 एमएल/एकड़ का छिड़काव किया जा सकता है।
वहीं तना मक्खी, पीला मोजेक और इलियों जैसे कीटों के प्रबंधन के लिए बीटा साइफ्लूथ्रिन के साथ इमिडाक्लोप्रिड 140 एमएल/एकड़ अथवा थायमेथोक्सम के साथ लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 50 एमएल/एकड़ के प्रयोग की जानकारी दी गई।
भ्रमण के दौरान डीएपीओ प्रकाश ठाकुर, केवीके वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश भारती एवं रूपचंद जाटव सहित कृषि विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

