सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की के बीच हुए नए रक्षा समझौते के तहत कल तक पाकिस्तान सउदी अरब की मदद का दम भर रहा था आज पलट गया
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में अमेरिका-ईरान जंग के बीच एक नया मोर्चा खुल गया है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के किनारे बसे रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा (मोखा) पर कब्जा कर लिया है। गुरुवार को सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों के पीछे हटने के बाद हूतियों ने शहर में प्रवेश किया।
रॉयटर्स, CNN और WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों का यह हमला ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के सीधे मार्गदर्शन में हुआ है। ईरान ने हूतियों को सऊदी अरब पर हमले तेज करने के लिए और हथियार, फंडिंग और सीनियर कमांडर भेजने का वादा किया है।
मोचा पर कब्जा क्यों है इतना अहम…. ?
मोचा यमन के लाल सागर तट पर स्थित ऐतिहासिक बंदरगाह है, जो कभी कॉफी व्यापार के लिए मशहूर था। आज इसकी अहमियत भू-राजनीतिक है।
मोचा बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के बेहद करीब है। यह स्ट्रेट अपने सबसे संकरे हिस्से में सिर्फ 29 KM चौड़ा है और लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। एशिया-यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का यह सबसे अहम रास्ता है। दक्षिण से आने वाले जहाज इसी रास्ते से स्वेज नहर तक पहुंचते हैं।
अब स्थिति यह है – होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान ने नाकाबंदी कर रखी है और बाब-अल-मंदेब पर हूती। दोनों रास्ते बाधित होने से दुनिया के एनर्जी बाजार पर बहुत बड़ा असर पड़ सकता है। रॉयटर्स के अनुसार जून में बाब-अल-मंदेब से दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 7% तेल गुजर रहा था, जो अब और घट सकता है। ब्रेंट क्रूड इसी कारण 108 डॉलर के पार जा चुका है।
हूती अब हनिश द्वीप समूह पर भी हमले कर रहे हैं। अगर पेरिम द्वीप पर उनका कब्जा हो गया तो पूरे स्ट्रेट पर उनका नियंत्रण हो जाएगा।
सऊदी पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज
पिछले एक हफ्ते में हूतियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी शहरों खामिस मुशैत, आभा और जजान में ऊर्जा प्रतिष्ठानों और मिलिट्री बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से बड़े हमले किए हैं, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए हैं। जवाब में सऊदी अरब ने यमन में हवाई हमले तेज कर दिए हैं।
‘इस्लामिक NATO’ पर सवाल, पाकिस्तान ने झाड़ा पल्ला
सबसे बड़ा सवाल अब सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की के बीच हुए नए रक्षा समझौते को लेकर है, जिसे कई विश्लेषक ‘इस्लामिक NATO’ कह रहे हैं। समझौता एक महीने पहले ही हुआ था।
लेकिन पाकिस्तान ने साफ कहा है कि अभी सैन्य प्रतिक्रिया पर कोई चर्चा नहीं हुई है। पाकिस्तानी सूत्रों का कहना है कि इस्लामाबाद ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह अपने सहयोगी हूतियों को रोके, ताकि संकट और न बढ़े। पाकिस्तान सीधे युद्ध में उतरने से बच रहा है।
अमेरिका ने भी कहा है कि वह लाल सागर में नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर फोकस कर रहा है और सऊदी तथा यमनी सरकार के साथ लगातार संपर्क में है।

