अमेरिका की 100% टैरिफ की धमकी पर भारत का कड़ा जवाब – कहा, तेल खरीदेंगे अपने हिसाब से, किसी दबाव में नहीं झुकेंगे
_अमेरिकी सीनेट में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले नए बिल को पास किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जिसमें भारत और चीन भी शामिल हैं। इस पर भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव से तय नहीं होगी।_
मकडा़ई एक्सप्रेस 24दिल्ली । अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act 2026 को मंजूरी दी है। पहले इस बिल में 500% टैरिफ की बात थी, जिसे अब घटाकर 100% कर दिया गया है। इस कानून के तहत दुनिया के 5 सबसे बड़े रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है। वर्तमान में चीन और भारत रूस के सबसे बड़े खरीदार हैं। यह बिल अब अमेरिकी संसद के निचले सदन में पेश होना बाकी है।
भारत का पक्ष – ऊर्जा सुरक्षा सबसे पहले
भारत सरकार और मॉस्को में भारतीय राजदूत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत अपने 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। विदेश मंत्रालय का कहना है कि सस्ता रूसी कच्चा तेल भारत के आयात बिल को कम करने और महंगाई को काबू में रखने में मददगार रहा है। भारत ने अमेरिका से बातचीत में भी कहा है कि तेल खरीदने का फैसला भारत के आर्थिक हित और रणनीतिक स्वायत्तता के आधार पर होगा, न कि किसी धमकी के आधार पर।
व्यापार पर असर क्या होगा..?
वित्त वर्ष 2026 में भारत ने कुल कच्चे तेल का लगभग 30% रूस से खरीदा, जिसकी कीमत करीब 40.8 बिलियन डॉलर रही। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका 100% टैरिफ लगाता है तो भारत का अमेरिका को होने वाला करीब 83 बिलियन डॉलर का निर्यात बुरी तरह प्रभावित होगा। हालांकि, बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति को टैरिफ में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है।
अब आगे क्या …?
फिलहाल यह बिल कानून नहीं बना है और अमेरिकी संसद के दूसरे सदन में अटका हुआ है। भारत ने कहा है कि वह अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर बातचीत जारी रखेगा, लेकिन रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करेगा।

