दूसरे जिले से आ रही रेत की स्रोत से लेकर परिवहन तक हो जांच; अगर सब कुछ वैध है तो रात्रि में ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही क्यों?
हंडिया। हंडिया क्षेत्र में दूसरे जिले से रेत लेकर पहुंच रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लगातार आवाजाही को लेकर जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रेत परिवहन करने वालों द्वारा पूछताछ के दौरान मोबाइल में रॉयल्टी दिखाकर रेत को वैध बताया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या मौके पर केवल मोबाइल में रॉयल्टी देखकर जांच पूरी कर दी जाती है या रेत के वास्तविक स्रोत, वाहन, मात्रा और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों का भी नियमानुसार सत्यापन किया जाता है?
मामला सिर्फ रॉयल्टी दिखाने तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान यह स्पष्ट होना जरूरी है कि रॉयल्टी किस खदान या स्रोत के नाम पर है, किस वाहन के लिए जारी है, कितनी मात्रा की रेत के लिए है और हंडिया पहुंची रेत उसी वैध स्रोत से लाई गई है या नहीं। इसके साथ परिवहन संबंधी आवश्यक दस्तावेजों का भी नियमानुसार मिलान किया जाना चाहिए।
रात्रि में ही क्यों पहुंचती हैं रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां?
इस पूरे मामले में एक और सवाल महत्वपूर्ण है। यदि रेत का परिवहन पूरी तरह वैध है और सभी दस्तावेज सही हैं, तो दूसरे जिले से रेत लेकर आने वाली कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रात्रि के समय ही हंडिया क्षेत्र में क्यों पहुंचती हैं? क्या रात्रि में भी इन वाहनों की नियमित जांच होती है? क्या उस समय मौके पर संबंधित विभाग की जांच टीम मौजूद रहती है? और यदि जांच होती है तो कितने वाहनों की रॉयल्टी, स्रोत, मात्रा और परिवहन दस्तावेजों का सत्यापन किया गया—इन सवालों के जवाब भी सामने आने चाहिए।
रात्रि में परिवहन अपने आप में अवैधता का प्रमाण नहीं है, लेकिन लगातार रात के समय रेत से भरे वाहनों की आवाजाही होने पर रात्रिकालीन जांच व्यवस्था की प्रभावशीलता जरूर जांच का विषय बनती है।
एक बार जांच हो तो स्पष्ट हो सकती है पूरी तस्वीर
प्रशासन और खनिज विभाग यदि हंडिया क्षेत्र में अचानक जांच अभियान चलाकर रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की जांच करे तो स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है। रेत कहां से आई, किस खदान से निकली, रॉयल्टी किस वाहन और कितनी मात्रा के लिए है, वाहन किस मार्ग से आ रहा है और मौके पर मौजूद रेत दस्तावेजों में दर्ज जानकारी से मेल खाती है या नहीं—इन सभी बिंदुओं का सत्यापन किया जा सकता है।
मांग है कि दूसरे जिलों से हंडिया आने वाली रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की दिन और रात दोनों समय अचानक जांच की जाए। मोबाइल में दिखाई जा रही रॉयल्टी का संबंधित रिकॉर्ड से मिलान हो तथा रेत के स्रोत, वाहन और मात्रा का भी नियमानुसार सत्यापन किया जाए।
यदि जांच में सभी दस्तावेज और रेत का स्रोत सही पाए जाते हैं तो रेत परिवहन को लेकर उठ रहे सवालों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वहीं किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी। फिलहाल सवाल यही है—जब सब कुछ वैध है, तो रात्रि में होने वाले इस रेत परिवहन की भी उतनी ही पारदर्शी जांच क्यों नहीं?

