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आगरा के युवा समाजसेवी आराम सिंह गुर्जर को गुर्जर महोत्सव सूरजकुंड में किया सम्मानित !  पूरी खबर विस्तार से पढ़े

दिल्ली: सूरजकुंड फरीदाबाद में आयोजित गुर्जर महोत्सव 2025 में आगरा के   ई-रिक्शा चालक आराम सिंह गुर्जर भी शामिल हुए।

जहां गुर्जर महोत्सव समिति के अध्यक्ष दिवाकर विधूडी जी के द्वारा आराम सिंह गुर्जर को स्मृतिचिन्ह भेट कर मंच पर सम्मानित किया गया।

इस मौके पर गुर्जर मेला समिति के पदाधिकारियों ने युवा समाजसेवी के द्वारा किए जा रहे निस्वार्थ सेवा और मानव कल्याण कार्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि समाज में आराम सिंह गुर्जर जैसे ऐसे युवा भी है। जिन्होंने सर्व समाज के लिए निस्वार्थ भाव से सेवा कर अपने समाज को गौरवान्वित किया है।इस मौके पर आराम सिंह गुर्जर ने आयोजक समिति का आभार माना।

मालूम हो कि गुर्जर महोत्सव मेले में देश दुनिया के गुर्जर समाज के लोग शामिल होते है।

 

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जानिए कौन है आगरा के युवा समाजसेवी आराम सिंह गुर्जर 

उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा जहाँ स्मारकों की भव्यता हर कोने पर ध्यान आकर्षित करती है, वहीं एक आम नागरिक का असाधारण सेवा भाव चुपचाप कई जिंदगियों को छू रहा है। यह कहानी है कमला नगर निवासी आराम सिंह गुर्जर की, जो केवल एक माली या ई-रिक्शा चालक नहीं हैं, बल्कि निस्वार्थ सेवा और मानव कल्याण के जीते-जागते प्रतीक हैं। उन्हें उनके उत्कृष्ट समाज सेवा के कार्यों के लिए आगरा रत्न अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है, जो उनकी अटूट समर्पण और मानवीयता की भावना का प्रमाण है।

 

आराम सिंह, जो सुबह के समय एक ई-रिक्शा चलाते हैं और शाम को जूते बनाने वाली एक फ़ैक्टरी में काम करते हैं, अपने जीवन को एक साधारण माली के रूप में शुरू करने के बावजूद, सर्व समुदाय की सेवा को सर्वोपरि मानते हैं। उनका दर्शन सीधा और सशक्त है: “कर्म ही पूजा है।” उनकी सेवा केवल एक रोज़मर्रा का काम नहीं, बल्कि एक मिशन है—स्कूल जाने वाले बच्चों, बुज़ुर्गों (वृद्धों), और दिव्यांगों को उनके गंतव्य तक निःशुल्क और सुरक्षित रूप से पहुँचाना।

 

ई-रिक्शा: निस्वार्थ यात्रा का वाहन

आराम सिंह की सेवा का सबसे प्रमुख पहलू उनका ई-रिक्शा है। यह उनके लिए केवल एक वाहन नहीं है; यह एक चलती-फिरती सेवा परियोजना है। उन्होंने यह ई-रिक्शा लगभग तीन साल पहले खरीदा था, लेकिन इसे चलाने के पीछे उनका मकसद कभी भी केवल पैसा कमाना नहीं रहा। जैसा कि उन्होंने बताया, “मैंने देखा है कि धूप में बच्चे पैदल स्कूल जाते हैं या उनके दादा-दादी/मम्मी उनको छोड़ने में परेशान होते हैं। कई ऐसे परिवार भी हैं जिनके पास बच्चों को स्कूल बस या वैन में भेजने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते।”

 

इस अवलोकन ने उन्हें प्रेरित किया। उन्होंने अपनी ई-रिक्शा सेवा को पूरी तरह से निःशुल्क कर दिया। सुबह के समय, उनकी ई-रिक्शा एक ‘स्कूल-वैन’ बन जाती है, जो स्कूली बच्चों को उनके घरों से स्कूल और फिर वापस निःस्वार्थ भाव से छोड़ती-लाती है। इसके अतिरिक्त, वे बुज़ुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों को भी बिना किसी शुल्क के उनके घर या गंतव्य तक पहुँचाते हैं। यह सेवा एक ऐसी अनमोल भेंट है जो वित्तीय बाधाओं को दूर करती है और यह सुनिश्चित करती है कि समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग सुरक्षित और सम्मानजनक तरीक़े से यात्रा कर सकें।

 

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शुरुआत में, बच्चों को उनकी निःशुल्क सेवा पर विश्वास करने में कुछ हिचकिचाहट हुई थी, जैसा कि अक्सर अनपेक्षित परोपकार के साथ होता है। लेकिन, जैसे-जैसे लोगों ने आराम सिंह की सत्यनिष्ठा और समर्पण को पहचाना, उनकी यह सेवा कमला नगर और आस-पास के क्षेत्रों में विश्वास और खुशी का एक मज़बूत स्तंभ बन गई है। बच्चे अब खुशी-खुशी उनकी सेवा का लाभ उठाते हैं, और उनके माता-पिता निश्चिंत रहते हैं।

 

आर्थिक स्थिति और मानवीय प्रेरणा

आराम सिंह की कहानी को जो बात और भी अधिक प्रेरणादायक बनाती है, वह है उनकी अपनी आर्थिक पृष्ठभूमि। एक माली और फ़ैक्टरी में काम करने वाले एक श्रमिक के रूप में, उनकी आय शायद ही अच्छी होगी। हालाँकि, वह अपनी आर्थिक स्थिति को किसी की मदद करने के मार्ग में बाधा नहीं बनने देते।

 

वह इस बात की प्रतीक्षा नहीं करते कि वह ‘आर्थिक रूप से सक्षम’ हो जाएँ, बल्कि वह हर दिन अपनी मेहनत की कमाई और समय को समाज सेवा में लगाते हैं। यह उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि सेवा करने के लिए विशाल धन की नहीं, बल्कि एक विशाल हृदय की आवश्यकता होती है।

 

उन्होंने स्वयं गरीबी देखी है। इस अनुभव ने उन्हें दूसरों के दुख और कठिनाइयों के प्रति संवेदनशील बनाया है। उनका कहना है, “मैंने ग़रीबी देखी है। हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए बस या वैन लगाने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए मैं मदद करता हूँ।” यह साधारण-सा वक्तव्य उनके निस्वार्थ कार्यों के पीछे की गहरी मानवीय भावना को उजागर करता है। उनकी सेवा एक प्रतिक्रिया है—गरीबी और अभाव के प्रति एक संवेदनशील और सक्रिय प्रतिक्रिया।

 

सम्मान और पहचान: आगरा रत्न

आराम सिंह गुर्जर के अतुलनीय योगदान को उनके शहर ने मान्यता दी है। उन्हें उनके समाज सेवा के कार्यों के लिए प्रतिष्ठित आगरा रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार न केवल उनके द्वारा किए गए विशिष्ट कार्यों की पहचान है, बल्कि यह उन मूल्यों की भी पुष्टि करता है जो वे जीते हैं: दयालुता, निःस्वार्थता और सामुदायिक जिम्मेदारी।

यह सम्मान उन हज़ारों गुमनाम नायकों को भी एक उम्मीद देता है, जो चुपचाप अपने समुदाय की सेवा कर रहे हैं। आगरा रत्न अवार्ड यह सिद्ध करता है कि सच्ची महानता अक्सर विनम्रता और निःस्वार्थ सेवा के कार्यों में निहित होती है, न कि केवल सार्वजनिक प्रसिद्धि या धन में।

 

संक्षेप में, आराम सिंह गुर्जर आगरा में एक प्रेरणा के प्रतीक बन गए हैं। एक साधारण नागरिक के रूप में, वे अपनी रोज़मर्रा की नौकरी के साथ-साथ ई-रिक्शा चलाकर समाज की निस्वार्थ सेवा करते हैं। उनका जीवन एक शक्तिशाली संदेश देता है: हमारा सबसे बड़ा धन वह नहीं है जो हमारे पास है, बल्कि वह है जो हम दूसरों को देते हैं।

 

आराम सिंह हमें सिखाते हैं कि समाज सेवा कोई बड़ा, संगठित प्रयास नहीं है; यह एक दैनिक चुनाव है, एक दयालु कार्य है जिसे हम अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते हैं। वे उन लोगों के लिए एक मिसाल हैं जो सोचते हैं कि वे अपने सीमित साधनों के कारण समाज के लिए कुछ नहीं कर सकते।

 

वह वास्तव में एक ऐसे ‘गार्डियन एंजेल’ हैं जो पहियों पर सवार होकर आगरा की गलियों में खुशियाँ, सुरक्षा और आशा बाँटते हैं। उनका निःस्वार्थ समर्पण और मानवीय भावना न केवल आगरा के लोगों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है।

सौजन्य@ पत्रकार मोहम्मद शाहिद की कलम से