मकड़ाई एक्सप्रेस 24 हरदा। साल 2025 की विदाई और नए वर्ष 2026 के स्वागत की तैयारियां पूरे जिले में जोर-शोर से चल रही हैं। लेकिन इस उत्साह के बीच एक काला सच भी सामने आ रहा है। जिले में नशे का अवैध कारोबार अपनी जड़ें शहर की गलियों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक जमा चुका है। यदि पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग समय रहते मुस्तैद नहीं हुआ, तो नए साल की पार्टियों में ‘छलकते जाम और उड़ता धुआं’ किसी बड़ी अप्रिय घटना का कारण बन सकता है।
ग्रामीण इलाकों में पैर पसारता नशे का सौदा
आमतौर पर नशे का केंद्र शहरों को माना जाता है, लेकिन हरदा के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब स्थिति चिंताजनक हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, नए साल के आयोजनों के लिए अवैध शराब, सिंथेटिक ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थों का मौजूदगी और एजेंटो द्वारा आशंका है कि यह युवाओं को निशाना बनाकर यह ‘मौत का सामान’ खपाने की तैयारी है।
पार्टियों में सुरक्षा और कानून की चुनौती
31 दिसंबर की रात आयोजित होने वाली निजी और सार्वजनिक पार्टियों में नशा परोसने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। नशे की हालत में सड़क दुर्घटनाएं ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ के मामलों में भारी बढ़ोतरी होती है।
युवाओ द्वारा नशे के प्रभाव में मामूली बात पर झगड़े बड़े अपराधों का रूप ले लेते हैं।31 दिसम्बर की रात सड़को पर बाइक पर 3-4 सवार होकर हुड़दंगियों के कारण शांति व्यवस्था भंग होने का खतरा बना रहता है।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका अहम
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि केवल औपचारिक चेकिंग से काम नहीं चलेगा। पुलिस को उन संदिग्ध ठिकानों पर दबिश देनी होगी जहां नशे की खेप पहुंच रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में गश्त बढ़ाना और मुख्य मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चलाना इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
“नया साल नई उम्मीदों का होना चाहिए, न कि किसी के घर का चिराग बुझने का कारण। प्रशासन की सख्ती और जनता की जागरूकता ही नशे के इस काले कारोबार पर लगाम लगा सकती है।”
हरदा जिले की शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि नए साल का जश्न मर्यादित हो। पुलिस प्रशासन को ‘अलर्ट मोड’ पर रहकर नशा तस्करों के नेटवर्क को तोड़ना होगा, ताकि कोई भी अप्रिय घटना जिले की खुशियों में खलल न डाल सके।

