मकड़ाई एक्सप्रेस 24 रायपुर।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की पुरजोर वकालत की है। रायपुर के सोनपैरी गांव में आयोजित हिंदू सम्मेलन और एम्स रायपुर में युवाओं के साथ संवाद करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अरावली जैसी प्राकृतिक धरोहरों को केवल ‘पत्थरों का ढेर’ समझकर नष्ट किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने होंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अरावली पहाड़ियां उत्तर भारत के पारिस्थितिक तंत्र का आधार हैं और इनके संरक्षण के बिना स्थायी विकास संभव नहीं है।
सामाजिक समरसता और भेदभाव मुक्त समाज का आह्वान
डॉ. भागवत ने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच और भेदभाव को खत्म करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी मंदिर, जल स्रोत और श्मशान घाट हर हिंदू के लिए समान रूप से खुले होने चाहिए।
किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी जाति, संपत्ति या भाषा के आधार पर नहीं, बल्कि उसके गुणों के आधार पर होना चाहिए। अलगाव को छोड़कर सभी को एक-दूसरे के घर आना-जाना चाहिए ताकि सामाजिक समरसता को मजबूती मिले।
कुटुंब प्रबोधन: परिवार के साथ बिताएं ‘मंगल संवाद’
बढ़ते अकेलेपन और नशे की समस्या पर चिंता जताते हुए सरसंघचालक ने ‘कुटुंब प्रबोधन’ का मंत्र दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि हर परिवार को सप्ताह में कम से कम एक शाम एक साथ बितानी चाहिए। इस ‘मंगल संवाद’ के दौरान घर का बना भोजन करें, भजन करें और महापुरुषों की चर्चा करें। आदेश देने के बजाय आपसी सहमति से घर चलाने का प्रयास युवाओं को गलत रास्तों से बचाने में सहायक होगा।
राष्ट्र निर्माण के लिए पांच कार्य
संबोधन के दौरान भागवत ने पांच प्रमुख सिद्धांतों (पंच परिवर्तन) को जीवन में उतारने की अपील की:
1. सामाजिक समरसता हो जातिगत भेदभाव का त्याग।
2. पर्यावरण संरक्षण करने। प्लास्टिक का त्याग, जल संचयन और पौधारोपण को घरेलू स्तर पर शुरू करना।
3. स्वबोध और स्वावलंबन के तहतस्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देना और अपनी भाषा व संस्कृति पर गर्व करना।
4. नागरिक कर्तव्य: संविधान की प्रस्तावना और देश के नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करना।
5. पारिवारिक संवाद बन्द। परिवार के सदस्यों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करना।
शताब्दी वर्ष और संघ का विस्तार
संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उन्होंने बताया कि नागपुर की एक छोटी सी शाखा से शुरू हुआ यह कार्य अब देश के हर कोने में फैल चुका है। स्वयंसेवक ‘हिंदू राष्ट्र’ की उन्नति के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं और शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में समाज के हर वर्ग तक पहुँचने के लिए देश भर में ऐसे सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।

