jhankar
ब्रेकिंग
हंडिया तहसीलदार की नाक के नीचे राजस्व अमले का ‘खेल’? 7 अगस्त को अतिक्रमण माना, 20 अगस्त को शासकीय रा... जनपद पंचायत खिरकिया में पंचायत सचिव एवं सरपंचों की प्रशिक्षण-सह कार्यशाला आयोजित फसल में मृदा जनित बिमारियों की रोकथाम हेतु किसानों को सलाह महाविद्यालय के छात्र छात्राओं ने सीखा ‘फर्स्ट एड’ करना उच्चदाब कनेक्शन बंद होने के बाद सुरक्षा निधि की वापसी अब ऑनलाइन,उपभोक्ताओं को नहीं लगाना पड़ेगा कार्य... मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कार्यक्षेत्र में प्रधानमंत्री धरती आबा-जन जातीय ग्राम उत्कर्ष अभिया... राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय एवं पंचायत उपनिर्वाचन कार्यक्रम घोषित माह के पहले कार्य दिवस की शुरूआत ‘‘वंदेमातरम्’’ गायन से हुई कलेक्टर ने जनसुनवाई में सुनी नागरिकों की समस्याएं दिल्ली में 47 KM तक चलती बस में नाबालिग से दरिंदगी, राहुल गांधी ने उठाए सरकार पर सवाल

रावण दहन के साथ शस्त्रों का भी व्यापक रूप से हो पूजन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विजयादशमी के पावन पर्व पर इंदौर पुलिस लाइन में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में परम्परागत शौर्य परम्परा का निर्वहन करते हुए हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने माँ कालका की आराधना के साथ परम्परागत तलवार, भाला से लेकर अत्याधुनिक एके-47 और अन्य अस्त्र-शस्त्रों का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन किया।

- Install Android App -

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विजयादशमी केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व ही नहीं, बल्कि यह शौर्य, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देने वाला उत्सव है। शस्त्र केवल युद्ध का साधन नहीं, बल्कि अनुशासन और मर्यादा के प्रतीक भी हैं। हमारी पुलिस और सुरक्षा बल इन्हीं शस्त्रों के माध्यम से समाज की रक्षा का संकल्प लेते हैं। इस परंपरा का संरक्षण करना हम सबका दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी पर रावण दहन के साथ शस्त्रों का पूजन भी व्यापक रूप से होना चाहिए। उन्होंने प्रदेश में शस्त्र पूजन की परंपरा को और व्यापक रूप में मनाने के लिए नई सोच और नए संकल्प के साथ इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस पर्व को हर जिले में जनसहभागिता और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए ताकि यह परंपरा और भी सशक्त हो। उन्होंने कहा कि शस्त्र और सैनिक एक दूसरे के पर्याय है। भारतीय परम्परा में शिव और शक्ति को एक ही माना गया है। हमारे यहां अर्धनारीश्वर की पूजा होती है। सभी त्यौहार और पर्व आनंद और उल्लास के साथ मनाया जाना चाहिए।