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भारतीय रेलवे में ‘ग्रीन रिवोल्यूशन’: गणतंत्र दिवस पर इतिहास रचेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन!

सोनीपत-जींद मार्ग पर शुरू होगा भविष्य का सफर

मकड़ाई एक्सप्रेस 24हरियाणा।

भारतीय रेलवे स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित करने जा रही है। हरियाणा के सोनीपत-जींद रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल रन 26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस) के ऐतिहासिक अवसर पर होने की पूरी संभावना है।

उत्तर रेलवे के अधिकारियों और तकनीकी टीमों ने इसके लिए कमर कस ली है। हाल ही में प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर ने रेलवे ट्रैक, सिग्नलिंग सिस्टम और प्लेटफॉर्म की तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया है, जो इस बात का संकेत है कि देश अब ‘नमो ग्रीन रेल’ के स्वागत के लिए तैयार है।

जींद में देश का सबसे बड़ा हाइड्रोजन प्लांट तैयार

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए हरियाणा के जींद में भारत का सबसे बड़ा हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र (Hydrogen Plant) स्थापित किया गया है। यह प्लांट पूरी तरह कार्यात्मक हो चुका है और ट्रेन को ईंधन की आपूर्ति के लिए तैयार है।

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यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली पैदा होती है।जो कि प्रदूषण मुक्त है।इस प्रक्रिया में उत्सर्जन के रूप में केवल पानी और वाष्प (Steam) निकलते हैं, जिससे यह पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है।

शानदार स्पीड और आधुनिक सुविधाएँ

चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा निर्मित इस आठ-कोच वाली ट्रेन की कई विशेषताएं इसे खास बनाती हैं:

यह ट्रेन 110 से 140 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है। इसका लुक किसी आधुनिक मेट्रो की तरह है, जिसमें ऑटोमैटिक दरवाजे और एयर-कंडीशंड कोच होंगे। एक बार में यह लगभग 2,500 यात्रियों को सफर कराने की क्षमता रखती है।

क्यों खास है यह बदलाव…?

भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों (जर्मनी, फ्रांस, चीन और स्वीडन) की सूची में शामिल होने जा रहा है जिनके पास हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक है।

यह पहल 2030 तक भारतीय रेलवे को ‘नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जक’ बनाने के संकल्प का हिस्सा है।हाइड्रोजन ट्रेनें आने से रेलवे की डीजल पर निर्भरता कम होगी, जिससे करोड़ों रुपयों के विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इंजन रहित होने के कारण यह ट्रेन बहुत ही शांत तरीके से चलती है।