हंडिया : मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती का 61वां पुण्य स्मृति दिवस श्रद्धा और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया!
“45 वर्ष की आयु में शरीर त्यागकर भी करोड़ों आत्माओं के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं मातेश्वरी”!
हंडिया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, हंडिया सेवा केंद्र में मंगलवार 24 जून को संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका एवं जगदंबा स्वरूप आदरणीय मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की 61वीं पुण्य स्मृति श्रद्धा और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाई-बहन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी आरती बहन जी ने मातेश्वरी के दिव्य जीवन, त्याग, तपस्या और आध्यात्मिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म वर्ष 1919 में अमृतसर में हुआ था। बचपन में उनका नाम राधा रखा गया था। मात्र 16 वर्ष की आयु में वे ईश्वरीय ज्ञान से जुड़ गईं और अपने तप, त्याग, प्रेम एवं साधना के बल पर लाखों लोगों के जीवन में परिवर्तन का माध्यम बनीं।
उन्होंने बताया कि मातेश्वरी दिव्य प्रेम, ज्ञान, सादगी, पवित्रता और मातृत्व भाव की प्रतिमूर्ति थीं। उनके प्रेमपूर्ण मार्गदर्शन, आत्मीय व्यवहार और सेवा भावना के कारण ही उन्हें “मातेश्वरी” की उपाधि प्राप्त हुई। उन्होंने अपने गहन योगबल और आध्यात्मिक शक्ति से असंख्य आत्माओं को जीवन की सही दिशा प्रदान की।
आरती बहन जी ने कहा कि मातेश्वरी सदैव शक्ति स्वरूप, निर्भय और सत्य मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाली महान आत्मा थीं। वे हर परिस्थिति में लोगों को साहस, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती थीं। उनका जीवन आज भी सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक उत्कृष्टता का प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी भाई-बहनों ने मातेश्वरी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। अंत में सभी ने सामूहिक रूप से मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।

