jhankar
ब्रेकिंग
जेल रोड पर खुले गड्ढे बने जानलेवा, सोमवार को घुटने भर पानी में छिपा गड्ढा , व्यापारियों ने जताई हादस... मध्यप्रदेश पर्यटन क्विज-2026 के लिए ऑनलाइन पंजीयन 25 जुलाई 2026 तक,विद्यार्थियों को जानने को मिलेगी ... दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान का तीसरा चरण 13 जुलाई से चेक बाउंस के प्रकरणों निराकरण हेतु 18 जुलाई और 21 नवंबर को होगी विशेष लोक अदालत जल मग्न होने वाली पुलियाओं पर बेरिकेड एवं सुरक्षा इंतजाम रखे जाएं - कलेक्टर कोर्ट के फैसले पर भड़काऊ पोस्ट करना पड़ा भारी पुलिस ने 2 आरोपी दबोचे  हरदा : भारतीय किसान संघ का मूंग खरीदी को लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन तीसरे दिन भी रहा जारी। Harda mp: 100% मूंग खरीदी की मांग को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन; आंदोलन की द... 6 जुलाई 2026 सोमवार को मप्र की खास खबरें मकडा़ई एक्सप्रेस 24 के साथ (*MakdaiExpress24 MP TOP 20*) 6 जुलाई 2026, सोमवार को देश-दुनिया की 20 खास खबरें मकडा़ई एक्सप्रेस 24 के साथ (Makdaiexpress24 NEWS-...

भावना डेहरिया को विक्रम अवॉर्ड दिए जाने पर हाईकोर्ट की रोक

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विक्रम अवार्ड-2023 पर्वतारोही भावना डेहरिया को दिए जाने पर अंतरिम रोक लगा दी। साहसिक खेलों के लिए दिए जाने वाले इस अवॉर्ड को लेकर एक और पर्वतारोही ने आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। पर्वतारोही मेघा परमार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि भावना से पहले माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने में वे आगे थीं।

क्या है विक्रम अवॉर्ड का पूरा मामला?
मध्य प्रदेश की सीहोर निवासी पर्वतारोही मेघा परमार ने इस याचिका में कहा कि मध्य प्रदेश शासन ने 2023 के साहसिक खेलों के लिए विक्रम अवार्ड की घोषणा की है। इसके अंतर्गत छिंदवाड़ा निवासी पर्वतारोही भावना डेहरिया का चयन किया गया है, उन्हें पर्वतारोही भावना के चयन से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उन्होंने बताया कि 22 मई 2019 को दुनिया की सबसे ऊंची छोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वालों में वह अग्रणी थीं। पर्वतारोही ने याचिका में बताया कि उन्होंने भावना डेहरिया से पहले तिरंगा फहरा दिया था और दोनों के बीच पांच घंटे का अंतराल था।

- Install Android App -

भावना से पहले मेघा पहुंचीं थी माउंट एवरेस्ट की चोटी पर
याचिकाकर्ता मेघा परमार ने हाईकोर्ट के बताया कि दुनिया की सबसे ऊंची छोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वे सुबह पांच बजे पहुंच चुकी थीं, जबकि भावना सुब 9:45 पर वहां पहुंची थीं। याचिका में अपील की गई कि माउंट एवरेस्ट पहले फतह करने के कारण वे भी भावना की तरह विक्रम अवॉर्ड की हकदार हैं।

पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मेघा परमार की ओर से दलील दी गई थी कि 2022 में विक्रम अवार्ड के चयन की प्रक्रिया में नियमों को शिथिल करते हुए प्रदेश के दो पुरुष पर्वतारोही भगवान सिंह और रत्नेश के नामों पर मुहर लगाई गई थी। दोनों के बीच लक्ष्य हासिल करने में एक घंटे का अंतराल था। एक वर्ष में सिर्फ एक खिलाड़ी को अवॉर्ड देने का नियम बदलने का दृष्टांत सामने है। याचिकाकर्ता मेघा के लिए विक्रम अवॉर्ड पाने का नामांकन प्रक्रिया के अनुसार यह अंतिम अवसर है।

कोर्ट ने विक्रम अवॉर्ड दिए जाने पर लगाई अंतरिम रोक
इस याचिका की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए तर्क दिया कि इस अवॉर्ड की याचिकाकर्ता सही दावेदार हैं, इसलिए याचिका के अंतिम निराकरण तक उक्त अवार्ड किसी अन्य को नहीं दिया जाए। याचिका में यह भी बताया गया कि उन्हें प्रदेश में संचालित बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया गया था और भावना को यह अवसर मेघा के बाद हासिल हुआ। इस याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने भावना डेहरिया को फिलहाल विक्रम अवॉर्ड दिए जाने पर अंतरिम रोक लगा दी है, साथ ही याचिका में बदलाव की अनुमति प्रदान करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 5 जनवरी को निर्धारित की गई है।