इंदौर। देशभर में प्रसिद्ध इंदौर का हिंगोट युद्ध गौतमपुरा में धोक पड़वा पर इस बार करीब डेढ़ घंटे तक चला। दीपावली के दूसरे दिन सालों से चल रही इस परंपरा के तहत मैदान में गौतमपुरा और रूणजी के वीर योद्धा तुर्रा और कलंगी ने अलग-अलग समूहों में बंटकर करीब डेढ़ घंटे तक एक-दूसरे पर अग्नि बाणों की वर्षा की। हालांकि इस बार आधे घंटे पहले ही हिंगोट युद्ध खत्म हो गया। इसमें 5 योद्धा घायए हुए हैं।
यह एक ऐसा युद्ध है जो जानलेवा नहीं है, बल्कि साहस, परंपरा और लोक आस्था का प्रतीक है। इसमें हार-जीत नहीं, बल्कि शौर्य और परंपरा का प्रदर्शन मायने रखता है। यह युद्ध जितना खतरनाक होता है, उतना ही रोमांचक भी होता है।
1984 में राजीव गांधी ने बुलवाया था
साल 1984 में दिल्ली में हुए मालवा कला उत्सव में विशेष आमंत्रण पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सामने तुर्रा व कलंगी दल के योद्धाओं ने इसका प्रदर्शन किया था। उस समय करीब 16 योद्धाओं को नगर के प्रकाश जैन दिल्ली ले गए थे। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में करीब एक घंटे इसका प्रदर्शन किया गया था।

