jhankar
ब्रेकिंग
इंदौर में रंगपंचमी पर पारंपरिक गेर के लिए यातायात व्यवस्था का विशेष प्लान तैयार युवा किसान रत्ना की सफलता की कहानी: 21 की उम्र में आधुनिक खेती से लाखों की कमाई मध्य प्रदेश में अवैध खनिज परिवहन रोकने के लिए 40 ई-चेक पोस्ट की व्यवस्था कुशवाह बने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती करने वाले भोपाल के पहले किसान MP में दाल प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाई शुरू करने पर किसानों को मिलेगा 33% की सब्सिडी भोपाल : सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट किया तो होगी सख्त कार्रवाई इंदौर : पूरी तरह दृष्टिबाधित अक्षत बलदवा ने रचा इतिहास, पहले ही प्रयास में क्रैक की यूपीएससी हरदा : जल गंगा संवर्धन अभियान विकास का आधार और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास - म... Big news : प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में है पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी हरदा : स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था सुधार पर कलेक्टर का कड़ा रूख

इंदौर नगर निगम एमआईसी मेंबर मनीष मामा ने कर्मचारी को रिश्वत लेते पकड़ा

इंदौर। स्वच्छता में सात बार नंबर वन रहे इंदौर नगर निगम की साख पर खुद उसके कर्मचारियों ने बट्टा लगा दिया है। निगम मुख्यालय में एक महिला से उसकी आईडी रिकवर करने के बदले ₹400 की रिश्वत ली गई। भ्रष्टाचार का आलम यह रहा कि कर्मचारी ने यह राशि नकद के बजाय ऑनलाइन (पेटीएम) ट्रांसफर करवाई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है।

​एमआईसी सदस्य ने पकड़ी चोरी

​मामले का खुलासा तब हुआ जब एमआईसी सदस्य मनीष शर्मा (मामा) पीड़ित महिला को लेकर खुद निगम मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों के सामने इस भ्रष्टाचार पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। एक जनप्रतिनिधि का इस तरह पीड़ित के साथ मोर्चा संभालना निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और निचले स्तर के कर्मचारियों पर अफसरों के ढीले नियंत्रण की पोल खोलता है।

- Install Android App -

​डिजिटल भ्रष्टाचार का ‘नया मॉडल’

​डिजिटल इंडिया के इस दौर में निगम के गलियारों में भ्रष्टाचार का भी ‘डिजिटल मॉडल’ सामने आया है। आईडी सुधारने जैसे मामूली काम के लिए मजबूर महिला को परेशान किया गया और फिर साक्ष्य मिटाने या पकड़े जाने के डर से ऑनलाइन भुगतान लिया गया। घटना के बाद अब निगम कमिश्नर की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

​सवालों के घेरे में सिस्टम

​वीडियो वायरल होने के बाद शहर में चर्चा है कि क्या केवल निलंबन की कागजी कार्रवाई होगी या भ्रष्ट कर्मचारियों पर ठोस कानूनी एक्शन लिया जाएगा? लोगों का कहना है कि यदि निगम के भीतर बैठे इन ‘रिश्वतखोरों’ पर लगाम नहीं कसी गई, तो स्वच्छता की रैंकिंग सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।