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इंदौर जल त्रासदी: स्वच्छता के दावों के बीच दूषित पानी का कहर; कई मौतें, तीन अधिकारी नपे

मकड़ाई एक्सप्रेस 25 इंदौर | देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति ने प्रशासनिक दावों की कलई खोल दी है। पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में दूषित पानी पीने के कारण सैकड़ों लोग उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन का शिकार हो गए हैं।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस त्रासदी में अब तक 7 से 8 लोगों की जान जा चुकी है, हालांकि प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर फिलहाल 3 मौतों की पुष्टि की है। इस घटना ने शहर की बुनियादी स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री का कड़ा रुख: दो निलंबित, एक सेवा से पृथक

घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने कार्रवाई करते हुए:

जोन क्रमांक 4 के जोनल अधिकारी (शालिग्राम सितोले) और सहायक यंत्री (योगेश जोशी) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रभारी उपयंत्री (शुभम श्रीवास्तव) को लापरवाही के चलते तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक (Terminated) कर दिया गया है।

जांच समिति का गठन और मुआवज़ा

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आईएएस नवजीवन पंवार के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इस समिति में सुप्रिडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के डॉ. शैलेश राय शामिल हैं, जो पाइपलाइन लीकेज और लापरवाही के तकनीकी पहलुओं की जांच करेंगे।

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मुख्यमंत्री ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और सभी बीमारों का निःशुल्क उपचार करने की घोषणा की है।

कैसे हुआ हादसा ? सामने आई बड़ी लापरवाही

प्रारंभिक जांच में नगर निगम की भारी लापरवाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि भागीरथपुरा में मुख्य पेयजल पाइपलाइन के ठीक ऊपर एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कर दिया गया था।

पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण शौचालय का दूषित पानी (सीवेज) सीधे पीने के पानी में मिल गया। निवासियों का आरोप है कि वे पिछले कई दिनों से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने समय रहते ध्यान नहीं दिया।

समाजसेवियों और संगठनों ने प्रशासन को घेरा

वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने इस घटना को “प्रशासनिक अपराध” करार दिया है। उन्होंने कहा कि “मॉडल सिटी” के विज्ञापनों के पीछे शहर की बुनियादी व्यवस्थाएं खोखली हो चुकी हैं।

अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया और व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो संगठन जनहित में सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा।

सावधानी नोट: प्रशासन ने भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों को सलाह दी है कि वे केवल उबालकर या नगर निगम द्वारा भेजे गए टैंकरों का पानी ही पिएं।