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जेम्स वेब टेलीस्कोप ने खोजा विशाल “कॉस्मिक ट्रेल”

वाशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप (जेडब्ल्यूएसटी) ने खगोल विज्ञान की एक रोमांचक खोज की है। जेडब्ल्यूएसटी और चिली स्थित एएलएमए की संयुक्त ऑब्जर्वेशन में एनजीसी 3627 नामक एक दूरस्थ स्पाइरल गैलेक्सी में एक विशाल “कॉस्मिक ट्रेल” का पता चला है। यह गैलेक्सी लियो (सिंह) नक्षत्र में स्थित है और पृथ्वी से लगभग 31 मिलियन लाइट ईयर दूर है। यह ट्रेल लगभग 20,000 लाइट ईयर लंबा और 650 लाइट ईयर चौड़ा है, जो अब तक देखी गई सबसे बड़ी और स्पष्ट कॉस्मिक लकीरों में से एक माना जा रहा है। चीन की नानजिंग यूनिवर्सिटी के खगोल वैज्ञानिक मेंगके झाओ ने बताया कि यह खोज पीएचएएनजीएस सर्वे के दौरान सामने आई, जिसका उद्देश्य ब्रह्मांड में गैस, तारों के निर्माण और गैलेक्सी के ढांचे को समझना है। जेडब्ल्यूएसटी से प्राप्त डेटा ने संकेत दिया कि यह ट्रेल महीन धूल के कणों से भरी हुई है, जबकि एएलएमए के अवलोकन में इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की प्रचुरता भी देखी गई। इसका मतलब यह है कि यह केवल रोशनी की एक पट्टी नहीं, बल्कि किसी बड़े ब्रह्मांडीय व्यवधान का प्रमाण है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह निशान किसी विशाल कॉम्पैक्ट ऑब्जेक्ट, विशेष रूप से सुपरमैसिव ब्लैक होल के गुजरने से बना है।

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शोधकर्ताओं के अनुसार, यह ब्लैक होल लगभग 10 मिलियन सूर्यों के बराबर भारी था और 300 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से गैलेक्सी के बीच से गुजरा। इसकी अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण शक्ति ने आसपास की गैस और धूल को विस्थापित कर दिया, जिससे यह लंबा और स्पष्ट निशान बन गया। हालांकि कुछ वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह कोई ड्वार्फ गैलेक्सी (छोटी आकाशगंगा) का घना न्यूक्लियस भी हो सकता है, जो मुख्य गैलेक्सी से टकराने के बाद अपनी राह बनाकर निकल गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह कॉस्मिक ट्रेल लगभग 20 मिलियन वर्ष पुरानी है, यानी खगोलीय पैमाने पर यह हाल ही में हुई घटना है। गैलेक्सी की स्पाइरल आर्म्स से अलग दिशा में फैले इस निशान को देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी ने गैलेक्सी की डिस्क पर तेज धार से निशान किया हो।