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उज्जैन की कांता गोयल ने मां की ममता से संवार दिए 100 बच्चों के सपने

उज्जैन। मां सिर्फ जन्म देने वाली ही नहीं होती, बल्कि वो होती है जो अपने स्नेह से संतान का जीवन संवारती है। उज्जैन की कांता सुधीर भाई गोयल भी ऐसी ही एक मां हैं, जिनकी ममता का दायरा 100 से भी ज्यादा बच्चों तक फैला हुआ है. सेवा धाम आश्रम में रह रहे अनाथ, दिव्यांग और जरूरतमंद बच्चों के लिए कांता गोयल न सिर्फ सहारा बनीं, बल्कि उनके बेहतर भविष्य की रोशनी भी। महिला दिवस पर जानिए इस अनोखी मां की कहानी, जिनका मातृत्व स्नेह से भरा हुआ है।

आश्रम में 1100 से ज्यादा जरूरतमंद लोग

उज्जैन से 14 किलोमीटर दूर ग्राम अंबोदिया में स्थित सेवा धाम आश्रम एक ऐसा स्थान है, जहां 1100 से अधिक जरूरतमंद, दिव्यांग, अनाथ और असहाय लोग रहते हैं। लेकिन इस आश्रम की सबसे खास बात यह है कि यहां रहने वाले 100 से अधिक बच्चे कांता सुधीर गोयल को ‘मां’ कहकर पुकारते हैं। भले ही ये बच्चे उनसे जन्म से न जुड़े हों, लेकिन रिश्ता किसी भी सगे संबंध से कहीं ज्यादा गहरा और ममतामय है।

निस्वार्थ भाव से करती हैं बच्चों की देखभाल

सेवा धाम आश्रम में कांता सुधीर गोयल दिन-रात निस्वार्थ भाव से इन बच्चों की देखभाल करती हैं। उनका लालन-पालन, पढ़ाई-लिखाई, खेल-कूद और संस्कार, हर चीज का ध्यान रखती हैं। वह नन्हें बच्चों को अपनी गोद में खिलाती हैं, उन्हें प्यार से दुलारती हैं और बड़े बच्चों को शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाने का हरसंभव प्रयास करती हैं।

पूरा परिवार सेवा में समर्पित

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इस महान कार्य में कांता सुधीर गोयल के पति सुधीर भाई गोयल और उनकी दोनों बेटियां गोरी और मोनिका भी पूरी तरह सहयोग देती हैं। गोरी ने इवेंट मैनेजमेंट में एमबीए किया है। मोनिका ने समाज कार्य (MSW) की पढ़ाई की है। ये दोनों बहनें अपनी मां के साथ मिलकर इस आश्रम के हर सदस्य को परिवार का हिस्सा मानती हैं और उनके समग्र विकास में सहयोग देती हैं। जाति-धर्म से ऊपर मानवता की सेवा, बच्चों संग खेलती हैं घूमती हैं, डांस करती है पढ़ाती हैं। होमवर्क के साथ पेटिंग ,मेंहदी सहित अन्य कार्य भी सिखाती हैं।

बिना भेदभाव के रह रहे लोग

सेवा धाम आश्रम में कोई जाति, धर्म, संप्रदाय का भेदभाव नहीं है। यहां HIV, TB और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग भी एक परिवार की तरह रहते हैं। इस आश्रम में न सिर्फ बेसहारा लोगों को सहारा मिलता है, बल्कि यहां हर बच्चे को एक मां का प्यार और परिवार का संरक्षण भी मिलता है।

संस्कारों की पाठशाला

आश्रम में बच्चों को सिर्फ खाना और छत ही नहीं दी जाती, बल्कि जीवन के मूलभूत संस्कार भी सिखाए जाते हैं। यहां बच्चे अनुशासन, प्रेम, सेवा और स्वाभिमान का पाठ पढ़ते हैं। इस आश्रम का हर बच्चा यहां से निकलकर समाज में आत्मनिर्भर बनकर आगे बढ़ रहा है|कांता गोयल का कहना है कि ये सभी बच्चे मेरे लिए भगवान के आशीर्वाद हैं। मैं चाहती हूं कि इनका भविष्य उज्ज्वल हो और ये भी समाज के लिए कुछ कर सकें। वहीं, बच्चों का कहना है कि हमारी मां ने हमें हमेशा सेवा का महत्व सिखाया। अब हम भी उनके साथ मिलकर इस नेक काम में हाथ बंटा रहे हैं।

कांता गोयल की कहानी समाज के लिए प्रेरणा

कांता सुधीर गोयल ने यह साबित कर दिया कि मां सिर्फ जन्म देने वाली ही नहीं होती, बल्कि वह हर उस बच्चे की होती है, जिसे ममता और सहारे की जरूरत होती है। महिला दिवस पर यह कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा कर रही हैं।