हरदा में निर्माणाधीन पानी की टंकी से गिरने से मजदूर की मौत: न सुरक्षा उपकरण, न बीमा; ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की लापरवाही पर गंभीर सवाल
शिकायत में पिता ने लगाए गंभीर आरोप, बोले—बार-बार कहने पर भी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए; बेटे की मौत के बाद न्याय के लिए भटक रहा परिवार, एसपी से एफआईआर की मांग
मकड़ाई एक्सप्रेस हरदा। विकास नगर में निर्माणाधीन पानी की टंकी पर काम करने के दौरान 24 वर्षीय मजदूर सुंदरलाल की ऊंचाई से गिरकर हुई मौत के मामले में ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मृतक के पिता जमुनाप्रसाद ने 19 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक हरदा को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि काम के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। शिकायत के अनुसार, ऊंचाई पर काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा कवच और रस्सी जैसी व्यवस्था नहीं की गई थी। परिजनों ने मजदूरों का बीमा नहीं होने का आरोप भी लगाया है। शिकायत में बताया गया है कि 6 सितंबर 2026 को शाम करीब पांच बजे सुंदरलाल काम करते समय नीचे गिर गया, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई और पैर की हड्डी टूट गई। उसे हरदा जिला अस्पताल से भोपाल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पिता का आरोप है कि हादसे के बाद भी परिवार को इलाज और आगे की व्यवस्था के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा। अब परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर और न्याय की मांग की है।
शिकायत में पिता ने क्या-क्या लिखा?
पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन के अनुसार, शिकायतकर्ता जमुनाप्रसाद उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा सुंदरलाल करीब 24 वर्ष का था और अपने रिश्तेदार जयसिंह के साथ लगभग दो-तीन महीने पहले हरदा आया था। वह विकास नगर में पानी की टंकी के निर्माण कार्य में बेटा सुंदर लाल , ठेकेदार सुरेश के अधीन मजदूरी कर रहा था। शिकायत में मजदूरी 600 रुपये प्रतिदिन दिए जाने का उल्लेख भी किया गया है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पानी की टंकी पर निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए गए थे। ऊंचाई पर काम करने के बावजूद सुरक्षा रस्सी और सुरक्षा कवच उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, बार-बार कहने पर भी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई और लापरवाहीपूर्वक काम कराया जाता रहा।
6 सितंबर को हुआ हादसा, सिर में गंभीर चोट और पैर की हड्डी टूटी
शिकायत के मुताबिक, 6 सितंबर 2026 को शाम करीब पांच बजे सुंदरलाल विकास नगर स्थित पानी की टंकी पर काम कर रहा था। इसी दौरान वह ऊंचाई से नीचे गिर गया। उसके सिर में गंभीर चोट आई, मुंह से खून निकला और पैर की हड्डी टूट गई। शिकायत में कहा गया है कि हादसे के बाद वह चलने-फिरने की स्थिति में नहीं था।
उसके साथ मौजूद रिश्तेदार जयसिंह और अन्य लोगों ने उसे उठाया तथा मोटरसाइकिल से शासकीय जिला अस्पताल हरदा पहुंचाया। वहां से उसे भोपाल रेफर कर दिया गया। शिकायत में आरोप है कि ठेकेदार की ओर से एंबुलेंस की व्यवस्था कराकर उसे भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चला।
इलाज और आगे की व्यवस्था को लेकर भी शिकायत
आवेदन में पिता ने बताया कि भोपाल में इलाज के दौरान चार-पांच दिन बीत गए।लेकिन आराम नहीं लगा। इसके बाद ठेकेदार की ओर से सुंदरलाल को बरेली ले जाने की बात कही गई। शिकायत के अनुसार, परिवार को बताया गया कि वहां ले जाकर इलाज कराया जाएगा। बाद में ठेकेदार सुरेश ने भोपाल अस्पताल के डॉक्टर से बात कर सुंदरलाल को रेफर कराने की व्यवस्था की।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सुंदरलाल की हालत गंभीर थी और उसे भोपाल से बरेली ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था की गई। रास्ते में उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों को फोन पर सूचना दी गई। आवेदन के अनुसार, ठेकेदार ने परिवार से गांव ले जाकर अंतिम संस्कार करने को कहा और सुंदरलाल का अंतिम संस्कार 11 सितंबर 2026 को गांव में किया गया।
ठेकेदार सुरेश ने कहा—मैं केवल लेबर ठेकेदार हूं
मामले में ठेकेदार ने कहा है कि निर्माण कार्य दंडोतिया कंपनी का है और वह केवल लेबर ठेकेदार है। हरदा में रोहित नाम व्यक्ति काम देखता है। उसके अनुसार, घायल मजदूर के इलाज के लिए 48 हजार रुपये दिए गए थे। ठेकेदार ने मृतक के शराब पीने की आदत होने का आरोप भी लगाया है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हालांकि, यह जांच का विषय है कि हादसे के समय सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं, मजदूर का बीमा कराया गया था या नहीं और निर्माण कार्य में सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। यदि ठेकेदार केवल लेबर उपलब्ध कराने का काम करता था, तो निर्माण एजेंसी और अन्य जिम्मेदार पक्षों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
मजदूरों का रिकॉर्ड और बीमा भी जांच के दायरे में
इस मामले में दूसरे राज्यों से आकर काम करने वाले मजदूरों के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, श्रम विभाग हरदा और संबंधित थाने में मजदूरों का रिकॉर्ड नहीं होने की बात कही गई है। मजदूरों का बीमा भी नहीं होने का दावा किया गया है। इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि और लागू नियमों के अनुसार जांच जरूरी है।
एसपी से एफआईआर और कार्रवाई की मांग
जमुनाप्रसाद ने 19 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक हरदा को शिकायत देकर मामले की जांच कराने और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। आवेदन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 का उल्लेख किया गया है। पिता का कहना है कि उनका परिवार न्याय चाहता है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
अब पुलिस और श्रम विभाग की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं, मजदूरों का बीमा क्यों नहीं था, आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध थे या नहीं और हादसे के लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है।
सबसे बड़ा सवाल: जब मजदूरों से ऊंचाई पर जोखिम भरा काम कराया जा रहा था, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसने निभाई? एक मजदूर की मौत के बाद उसके परिवार को न्याय और नियमानुसार मुआवजा दिलाने के लिए जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

