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ईरान के तेल हब पर रिसाव, युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच बढ़ी चिंता

तेहरान। ईरान के सबसे बड़े तेल हब, खर्ग आइलैंड के पास समुद्र में एक बड़ा तेल रिसाव देखने को मिला है। इस डराने वाली घटना ने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आए इस विशाल रिसाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या यह कोई हादसा है या मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष का एक अप्रत्याशित परिणाम। यूरोप के एक सैटेलाइट सिस्टम से 6 से 8 मई के बीच ली गई तस्वीरों में खर्ग आइलैंड के पश्चिमी हिस्से में समुद्र पर तेल का एक बड़ा धब्बा साफ दिखाई दिया। समुद्र में तेल का रिसाव पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक होता है और समुद्री जीवन को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।

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विशेषज्ञों के आकलन के मुताबिक, यह रिसाव करीब 45 से 50 वर्ग किलोमीटर तक फैल चुका है। एक विशेषज्ञ ने इसे तेल जैसा ही बताया, जबकि दूसरे का मानना है कि यह वर्तमान क्षेत्रीय संघर्ष शुरू होने के बाद से देखा गया सबसे बड़ा तेल रिसाव हो सकता है। शुरुआती आकलन के अनुसार, इसमें करीब 3000 बैरल तक तेल समुद्र में फैल गया है। यदि ब्रेंट क्रूड का मौजूदा दाम 100 डॉलर प्रति बैरल माना जाए, तो लगभग 2.8 करोड़ रुपये मूल्य का तेल इस समय समुद्र में बह रहा है।

इस बड़े रिसाव की असली वजह अब तक साफ नहीं हो पाई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुरानी अंडरसी पाइपलाइन में खराबी या टैंकरों में जमा बड़े स्टॉक के कारण हुआ हो सकता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि खर्ग आइलैंड पर पहले कुछ सैन्य गतिविधियां भी देखी गई थीं, यद्यपि वे इस रिसाव से पहले अप्रैल की शुरुआत में हुई थीं और तेल भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा नहीं किया गया था। खर्ग आइलैंड ईरान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के लगभग 90 प्रातिशत तेल का निर्यात यहीं से होता है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण हब पर किसी भी तरह की समस्या सीधे ईरान की अर्थव्यवस्था और वैश्विक तेल बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। स्थिति इसलिए भी और गंभीर हो गई है क्योंकि एक महत्वपूर्ण जलमार्ग में बंदरगाहों की नाकेबंदी के कारण सैकड़ों तेल टैंकर फंसे हुए हैं और तेल की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस नाकेबंदी ने ईरान के तेल सिस्टम को खतरनाक स्थिति में पहुंचा दिया है, क्योंकि तेल उत्पादन को अचानक रोकना या फिर से शुरू करना आसान नहीं होता।