मकड़ाई एक्सप्रेस 24 | हरदा। पशुओं के चारे, भूसे और दवाइयों की बढ़ती कीमतों से परेशान पशुपालकों का अनिश्चितकालीन दूध बंद आंदोलन जारी है। हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से शहर में आने वाली ताजा दूध की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते लोग पैकेट वाले दूध पर निर्भर हो रहे हैं।
डेयरियों पर बढ़ी पैकेट दूध की मांग
दूध की सप्लाई रुकने के बाद शहर की कई डेयरियों पर पैकेट दूध की मांग बढ़ गई है। डेयरी संचालकों के अनुसार पशुपालकों द्वारा दूध नहीं दिए जाने से उन्हें सांची और अमूल जैसी कंपनियों के पैकेट दूध पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
ITI के पास पशुपालकों का धरना
पशुपालक इंदौर रोड और ITI के पास एकत्रित हुए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए धरना दिया। आंदोलनकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों से दूध लेकर आने वाले लोगों से दूध नहीं बेचने का आग्रह किया। पशुपालकों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
दूध के दाम बढ़ाने की मांग
पशुपालकों ने गाय के दूध का समर्थन मूल्य 50 रुपये और भैंस के दूध का 70 रुपये प्रति लीटर किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान लागत के मुकाबले दूध की कीमत कम होने से पशुपालन घाटे का सौदा बनता जा रहा है।
भूसा, खली और दवाइयों के बढ़े दाम
पशुपालकों के मुताबिक भूसे की कीमत पहले करीब 600-700 रुपये बोरी थी, जो अब 1200-1400 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं खली के दाम भी करीब 1700 से बढ़कर 2400 रुपये प्रति बोरी बताए जा रहे हैं। पशुओं की दवाइयों और इलाज का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।
डेयरियों के बाहर पुलिस बल तैनात
हड़ताल और पिछले दिनों हुए विवाद को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रमुख डेयरियों के बाहर पुलिस बल तैनात किया। पुलिस ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विवाद से बचने की अपील की है।
पशुपालकों का कहना है कि बढ़ती लागत के अनुपात में दूध का उचित मूल्य नहीं मिलने तक उनका ‘दूध बंद आंदोलन’ जारी रहेगा।

