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स्मार्ट मीटर नहीं लगवाने पर चस्पा हो रहा नोटिस!, 7 दिन के भीतर कट रहा है कनेक्शन

सागर। एक तरफ विद्युत नियामक आयोग कह रहा है कि स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है और दूसरी तरफ बिजली कंपनी के कर्मचारी घर-घर पहुंचकर दबाव बना रहे हैं कि स्मार्ट मीटर लगवाना ही होगा। जो व्यक्ति विद्युत नियामक आयोग के आदेश का हवाला देकर स्मार्ट मीटर लगवाने से मना कर रहे हैं, उनके घर पर अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करने पर स्थायी रूप से कनेक्शन काटने की सूचना का नोटिस चिपकाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है। वहीं, बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि विद्युत नियामक आयोग के आदेश को लेकर लोगों में गलतफहमी है।

उपभोक्ता पर स्मार्ट मीटर लगाने का दबाव
इन दिनों सागर जिले में बड़ी तेजी से स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान चल रहा है। इस अभियान के तहत बिजली कंपनी के कर्मचारी सीधे उपभोक्ता के घर पहुंच रहे हैं और मीटर बदलने के लिए कह रहे हैं। कुछ उपभोक्ता मीडिया में प्रकाशित उन खबरों का हवाला दे रहे हैं, जिसमें विद्युत नियामक आयोग के हवाले से कहा गया है कि मार्च 2028 तक मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है। लेकिन उन पर मीटर लगवाने का दबाव बनाया जा रहा है और ऐसा न करने पर उनके घर पर नोटिस चस्पा किया जा रहा है।

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मीटर नहीं लगाने पर काट रहे बिजली कनेक्शन
नोटिस में साफ तौर पर लिखा है कि आपके द्वारा कार्यालय के अधिकृत कर्मचारियों को अनाधिकृत रूप से रोका गया, जो कि नियम विरूद्ध है। वहीं अनुबंध की नियम शर्तों का पालन न करने का हवाला देकर बिजली कनेक्शन काटने की सूचना दी जा रही है। इस नोटिस के तहत उपभोक्ता को 7 दिन के अंदर संबंधित अधिकारी के दफ्तर जाकर अपना पक्ष रखना होता है। ऐसा न करने पर 7 दिन बाद कनेक्शन काट दिया जाता है।

‘मीटर लगाने से मना किया तो चिपकाया नोटिस’
सागर के अंकुर कालोनी के निवासी नीलेश जैन कहते हैं कि “हमारे घर पर स्मार्ट मीटर लगवाने के लिए बिजली कंपनी के कर्मचारी आए थे। मैंने अक्टूबर माह में विद्युत नियामक आयोग के हवाले से प्रकाशित उन खबरों की जानकारी दी, जिसमें कहा गया था कि मार्च 2028 तक मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है। इस पर कर्मचारियों का कहना था कि ऐसा कुछ नहीं है और स्मार्ट मीटर उनको लगवाना ही होगा। उनके पास आयोग के निर्देशों का कोई जवाब नहीं था। जब मैंने स्मार्ट मीटर लगाने से मना किया, तो उन्होंने नोटिस चिपका दिया है। जिसमें कनेक्शन काटने और बिजली कर्मचारियों को अनाधिकृत तरीके से रोकने की बात कही गई है।”