बेंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कर्नाटक के मांड्या स्थित श्री क्षेत्र आदिचुंचनगिरि में श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का भव्य उद्घाटन किया। यह उद्घाटन उनके कर्नाटक के आधिकारिक दौरे के दौरान हुआ, जो देश की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। इस विशेष अवसर पर, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी उपस्थित थे और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ संयुक्त रूप से सौंदर्य लहरी और शिव महिम्न स्तोत्रम नामक पुस्तक का विमोचन भी किया, जिसने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।
मंदिर का महत्व और इसकी अनूठी विरासत श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर श्री आदिचुंचनगिरि महासंस्थान मठ के 71वें पीठाधीश्वर, श्रद्धेय संत श्री श्री श्री डॉ. बालगांगधरनाथ महास्वामीजी को समर्पित एक भव्य स्मारक है। इस मंदिर का निर्माण पारंपरिक द्रविड़ स्थापत्य शैली में किया गया है, जो इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है। यह मंदिर न केवल दिवंगत संत के जीवन, उनके महान कार्यों और उनकी असाधारण विरासत के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि है, बल्कि इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा और मार्गदर्शन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य सिर्फ पूजा स्थल होना नहीं, बल्कि समाज को एकता और सद्भाव का संदेश देना भी है।
रंगाली बिहू की शुभकामनाएं और सांस्कृतिक एकता का संदेश मंदिर के उद्घाटन जैसे महत्वपूर्ण अवसर के साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को रंगाली बिहू (असमिया नव वर्ष) के पावन पर्व की भी हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, आप सभी को रंगाली बिहू की हार्दिक शुभकामनाएँ! यह जीवंत त्योहार नई शुरुआत, समृद्धि और एकजुटता की भावना का प्रतीक है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि आने वाला वर्ष सफलता, प्रसन्नता और उत्तम स्वास्थ्य से भरा हो।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि रंगाली बिहू असम के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो वसंत के आगमन और कृषि सीजन की शुरुआत का प्रतीक है। यह त्योहार असमिया संस्कृति की समृद्धि को दर्शाता है, जो आज न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना रही है। प्रधानमंत्री के इस संदेश ने एक बार फिर देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाने और उनकी सराहना करने की भावना को मजबूत किया।

