इंदौर वंदे मातरम विवाद: कांग्रेस की दो महिला पार्षदों पर FIR दर्ज, 4 घंटे की पूछताछ के बाद बड़ी कार्रवाई
मकडाई एक्सप्रेस 24 इंदौर । मध्य प्रदेश इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान शुरू हुआ ‘वंदे मातरम’ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। राष्ट्रगीत के अपमान के आरोप में एमजी रोड (MG Road) पुलिस ने कांग्रेस की दो महिला पार्षदों, रुबीना खान और फौजिया शेख के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। यह कार्रवाई लंबी पूछताछ और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
क्या है पूरा मामला ?
विवाद की शुरुआत इंदौर नगर निगम के हालिया बजट सत्र के दौरान हुई। परंपरा के अनुसार, सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ का गायन किया जाता है। आरोप है कि जब राष्ट्रगीत बज रहा था, तब कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने इसे गाने से न केवल इनकार किया, बल्कि कथित तौर पर सदन से बाहर जाने की कोशिश भी की।
इस व्यवहार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पार्षदों ने राष्ट्रगीत का अपमान बताया और सदन में जमकर हंगामा किया। भाजपा सदस्यों की मांग थी कि राष्ट्रीय प्रतीकों का अनादर करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
साढ़े चार घंटे चली पुलिस पूछताछ
विवाद बढ़ता देख पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। बुधवार को दोनों महिला पार्षदों को पूछताछ के लिए एमजी रोड थाने बुलाया गया। पुलिस अधिकारियों ने उनसे लगभग साढ़े चार घंटे तक सवाल-जवाब किए। पूछताछ के दौरान पार्षदों ने अपना पक्ष रखा, लेकिन पुलिस संतुष्ट नहीं हुई।
पुलिस की कार्रवाई और दर्ज धाराएं
नगर निगम के सभापति और भाजपा पार्षदों द्वारा सौंपे गए शिकायती पत्र और मौके के वीडियो फुटेज की जांच के बाद पुलिस ने केस दर्ज करने का निर्णय लिया।
मुख्य धाराएं : पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
वीडियो सबूत: पुलिस ने नगर निगम के आधिकारिक सीसीटीवी फुटेज और अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग्स को कब्जे में लिया है, जिसमें कथित तौर पर दोनों पार्षदों को राष्ट्रगीत के दौरान असहयोग करते देखा गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है..
भाजपा का पक्ष
भाजपा नेताओं का कहना है कि भारत में रहकर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का सम्मान करना हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है। इसमें किसी भी तरह की धार्मिक दलील स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस का बचाव
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इसे भाजपा की ‘बदले की राजनीति’ करार दिया है। पार्षदों का तर्क है कि वे राष्ट्र का सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी कुछ धार्मिक मान्यताएं उन्हें विशेष शब्दों के उच्चारण से रोकती हैं।
आगे क्या होगा ?
FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। यदि कोर्ट में आरोप सिद्ध होते हैं, तो पार्षदों की सदस्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है। फिलहाल इंदौर का सियासी माहौल इस घटना के बाद गरमाया हुआ है।
यह घटना राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता के बीच की बहस को एक बार फिर चर्चा में ले आई है। प्रशासन अब मामले की बारीकी से जांच कर रहा है।

