लंदन। इजरायल के खिलाफ लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर पर प्रदर्शन हो रहा था। ये लोग दोपहर 1 बजे, इकट्ठा हुए। उनके हाथों में कार्डबोर्ड और पोस्टर थे, जिन पर लिखा था- नरसंहार का विरोध, फिलिस्तीन का समर्थन। यह प्रदर्शन ब्रिटेन सरकार की ओर से ‘पैलेस्टाइन एक्शन’ नामक संगठन पर जुलाई में आतंकवाद निरोधी कानून के तहत लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में किया गया। माहौल शुरू से ही तना हुआ था। महात्मा गांधी और सामाजिक कार्यकर्ता मिलिसेंट फॉसेट की प्रतिमाओं के बीच जैसे ही पुलिस ने पोस्टर लिए लोगों को गिरफ़्तार करना शुरू किया, भीड़ गुस्से से भर गई।
पुलिस का कहना है कि उन्होंने अब तक 425 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें से 25 से ज्यादा को पुलिसकर्मियों पर हमले और सार्वजनिक शांति भंग करने के आरोप में पकड़ा गया। वहीं, आयोजकों का आरोप है कि पुलिस ने ‘बुज़ुर्ग और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को भी जबरदस्ती गिरफ़्तार किया’। प्रदर्शन में शामिल कई लोग सत्तर और अस्सी के दशक की उम्र के थे। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस पूरे घटनाक्रम की आलोचना करते हुए कहा कि ‘लंदन की सड़कों से लोगों को सिर्फ कार्डबोर्ड पकड़ने पर आतंकवाद कानून में गिरफ़्तार करना बेहद चौंकाने वाला है। लंदन के साथ-साथ स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबरा में भी छोटे स्तर पर प्रदर्शन हुए, जहां दो लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इससे पहले अगस्त में हुए एक प्रदर्शन में भी 500 से ज्यादा लोग गिरफ़्तार किए गए थे।

