अमावस्या पर उमड़ा आस्था का सैलाब, यातायात संभालने में पुलिस रही सक्रिय; चूना लाइनिंग, स्ट्रीट लाइट, बाईपास पर बिजली व्यवस्था और गौमाताओं के प्रबंधन में दिखीं खामियां, प्रतिबंध के बावजूद मेले में पॉलिथीन का उपयोग
हंडिया। सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर्व पर धार्मिक नगरी हंडिया में मां नर्मदा के दर्शन और स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे। श्री रिद्धनाथ घाट सहित प्रमुख घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा और श्रद्धालुओं ने स्नान के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।
भारी भीड़ के बीच पुलिस ने बैरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की तथा निर्धारित पार्किंग स्थलों पर वाहन खड़े करवाए। यातायात संभालने में पुलिस की सक्रियता और पुलिसकर्मियों के व्यवहार की वाहन चालकों ने सराहना की।
लेकिन दूसरी ओर, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तहसील कार्यालय स्थित अटल सुशासन भवन में तहसीलदार की अध्यक्षता में दो बार आयोजित बैठकों में तय की गईं कई व्यवस्थाएं पर्व के दौरान प्रभावी रूप से नजर नहीं आईं।
दुकानों के सामने चूने की लाइनिंग, प्रमुख मार्गों पर स्ट्रीट लाइट, बाईपास के दोनों प्रवेश मार्गों पर अस्थायी बिजली व्यवस्था, सड़क किनारे दुकानों का नियोजन, गौमाताओं के प्रबंधन और पॉलिथीन प्रतिबंध के पालन जैसे मुद्दे सवालों के घेरे में रहे। वहीं, चौदस की रात्रि श्री रिद्धनाथ मंदिर परिसर में हैंडपंप के पानी की निकासी अवरुद्ध होने से भी श्रद्धालुओं को परेशानी हुई। बाद में मीडिया के हस्तक्षेप के बाद निकासी व्यवस्था दुरुस्त करवाई गई।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब पर्व से पहले बैठकों में व्यवस्थाओं की रूपरेखा तैयार की गई थी, तो उनके क्रियान्वयन और मौके पर निगरानी की जिम्मेदारी किस स्तर पर निभाई गई?
दो बैठकों में बनी कार्ययोजना, फिर भी व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं की रूपरेखा तैयार की गई थी। इसमें दुकानों के सामने चूने से सीमा रेखा डालने, भिक्षावृत्ति करने वालों को घाटों से दूर बैठाने, चौक-चौराहों पर घूमने वाली गौमाताओं को गौशाला पहुंचाने, सड़क किनारे अस्थायी दुकानें लगाने वालों को उचित स्थान देने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रकाश व्यवस्था करने जैसे बिंदु शामिल थे।
इसके बावजूद पर्व के दौरान कई व्यवस्थाओं का अपेक्षित असर दिखाई नहीं दिया। इससे सवाल खड़ा होता है कि बैठकों में लिए गए निर्णयों को लागू कराने की जिम्मेदारी किसकी थी और मौके पर निगरानी किस स्तर पर की गई?
बाईपास से गांव में प्रवेश करने वाले दोनों मार्गों पर नहीं हुई अस्थायी बिजली व्यवस्था
अमावस्या पर्व को लेकर आयोजित बैठक में हंडिया के बाईपास की ओर से नेशनल हाईवे से गांव में प्रवेश करने वाले दोनों मार्गों पर लकड़ी के अस्थायी पोल खड़े कर बिजली की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया था। इसका उद्देश्य पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले मार्गों पर पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराना था।
लेकिन पंचायत की ओर से इन दोनों मार्गों पर लकड़ी के अस्थायी पोल खड़े कर बिजली की व्यवस्था नहीं की गई। इस कारण बैठक में तय की गई प्रकाश व्यवस्था धरातल पर नजर नहीं आई। जब पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना पहले से थी, तो दोनों प्रवेश मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं की गई? यह संबंधित जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली की समीक्षा का विषय है।
बस स्टैंड के नाके से रिद्धनाथ मंदिर तक स्ट्रीट लाइट बंद
पर्व के दौरान प्रकाश व्यवस्था की एक और कमी सामने आई। बस स्टैंड के पास बनाए गए नाके से लेकर श्री रिद्धनाथ मंदिर परिसर तक एक भी स्ट्रीट लाइट जलती हुई नजर नहीं आई। अमावस्या की रात श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में आवाजाही के बीच मार्ग पर रोशनी का अभाव परेशानी का कारण बना।
एक ओर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजामों की योजना बनाई गई थी, वहीं दूसरी ओर प्रमुख मार्ग पर स्ट्रीट लाइट बंद रहने से प्रकाश व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल उठे। ऐसे बड़े धार्मिक आयोजन से पहले प्रमुख मार्गों की लाइटों की जांच करना और खराब व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना जरूरी था।
रिद्धनाथ मंदिर परिसर में हैंडपंप के पानी की निकासी रुकी, मीडिया के हस्तक्षेप के बाद हुआ सुधार
चौदस की रात्रि श्री रिद्धनाथ मंदिर परिसर में लगे हैंडपंप से निकलने वाले पानी की निकासी अवरुद्ध हो गई थी। इसके कारण पानी परिसर में फैल रहा था और वहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
बताया गया कि समस्या के बावजूद किसी जिम्मेदार का इस ओर ध्यान नहीं गया। बाद में मीडिया के हस्तक्षेप के बाद पानी की निकासी दुरुस्त करवाई गई, जिससे समस्या का समाधान हुआ।
इस घटना ने भी व्यवस्थाओं की निगरानी पर सवाल खड़े किए। जब अमावस्या जैसे बड़े पर्व पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही संभावित थी, तो पानी की निकासी और साफ-सफाई जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं पर पहले से ध्यान क्यों नहीं दिया गया? क्या ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए मौके पर जिम्मेदार कर्मचारियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित नहीं की जानी चाहिए थी?
दुकानों के सामने चूना लाइनिंग नहीं, आवागमन बना चुनौती
बैठक में निर्णय लिया गया था कि दुकानों के सामने चूने से लाइन डालकर सीमा निर्धारित की जाएगी, ताकि दुकानदार अपनी सामग्री तय सीमा के भीतर रखें और श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए पर्याप्त जगह बनी रहे।
लेकिन पर्व के दौरान इस व्यवस्था का प्रभावी पालन नजर नहीं आया। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में दुकानों के बाहर सामग्री रखे जाने से आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बनी रही। ऐसे में सवाल है कि जब श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहले से संभावित थी, तो दुकानों की सीमा निर्धारित करने वाली व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू क्यों नहीं कराया गया?
प्रतिबंध के बावजूद मेले में पॉलिथीन का धड़ल्ले से उपयोग
कुछ दिन पहले ही प्रशासन की ओर से पॉलिथीन के उपयोग पर रोक लगाने के उद्देश्य से अभियान चलाया गया था। इस अभियान के माध्यम से लोगों को पॉलिथीन का उपयोग नहीं करने के लिए जागरूक किया गया था। लेकिन सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के मेले में पॉलिथीन का उपयोग खुले तौर पर होता नजर आया।
ऐसे में पॉलिथीन प्रतिबंध को लेकर चलाए गए अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि लोगों को जागरूक करने के साथ ही मेले में निगरानी और नियमों के पालन की व्यवस्था भी की जाती, तो पॉलिथीन के उपयोग पर नियंत्रण में मदद मिल सकती थी। सवाल यह भी है कि अभियान के बाद मेले में प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या निगरानी की गई?
सड़क किनारे अस्थायी दुकानें, यातायात पर पड़ा असर
बैठक में यह भी तय किया गया था कि मेले के दौरान सड़क किनारे दुकानें लगाने वाले दुकानदारों को उचित स्थान पर दुकानें लगाने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि यातायात बाधित न हो।
लेकिन पर्व के दौरान सड़क किनारे अस्थायी दुकानें लगने से भीड़भाड़ वाले मार्गों पर आवागमन में परेशानी की स्थिति बनी रही। यदि दुकानदारों के लिए पहले से स्थान निर्धारित कर व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जाती, तो श्रद्धालुओं की आवाजाही और यातायात को सुचारु रखने में मदद मिल सकती थी।
भिक्षावृत्ति और गौमाताओं के प्रबंधन की व्यवस्था भी अधूरी
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए घाटों पर भिक्षावृत्ति करने वालों को दूर बैठाने का निर्णय लिया गया था। इसी तरह हंडिया के चौक-चौराहों और सड़कों पर घूमने वाली गौमाताओं को स्थानीय गौशाला पहुंचाने की व्यवस्था बनाने की बात भी कही गई थी।
हालांकि, पर्व के दौरान इन व्यवस्थाओं का अपेक्षित क्रियान्वयन नजर नहीं आया। बड़े धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षित आवागमन और गौमाताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी था।
बैरिकेडिंग और पार्किंग से यातायात संभालने में पुलिस की सक्रियता
व्यवस्थाओं की कमियों के बीच पुलिस की भूमिका सकारात्मक रही। हंडिया बस स्टैंड सहित प्रमुख मार्गों पर पुलिसकर्मी तैनात रहे। बैरिकेडिंग के माध्यम से वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की गई और निर्धारित पार्किंग स्थलों पर वाहन खड़े करवाए गए।
चौदस की रात्रि से ही पुलिस ने यातायात व्यवस्था संभालने में सक्रिय भूमिका निभाई। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को देखते हुए वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की, जिससे यातायात प्रबंधन में मदद मिली। वाहन चालकों ने पुलिस की ड्यूटी और उनके व्यवहार की सराहना की। भारी भीड़ के बीच यातायात नियंत्रण के लिए पुलिस की यह सक्रियता आयोजन का उल्लेखनीय पक्ष रही।
बैठकों के निर्णयों की समीक्षा जरूरी, केवल योजना से नहीं चलती व्यवस्था
सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या हंडिया का प्रमुख धार्मिक पर्व है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां नर्मदा के दर्शन, स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे बड़े आयोजन में बैठकें आयोजित कर योजना बनाना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है कि तय व्यवस्थाएं समय पर धरातल पर दिखाई दें।
इस बार चूना लाइनिंग, प्रकाश व्यवस्था, बाईपास के दोनों प्रवेश मार्गों पर अस्थायी बिजली व्यवस्था, अस्थायी दुकानों के नियोजन, भिक्षावृत्ति प्रबंधन, गौमाताओं की व्यवस्था और पॉलिथीन प्रतिबंध के पालन जैसे मुद्दे समीक्षा का विषय बने। वहीं, श्री रिद्धनाथ मंदिर परिसर में हैंडपंप के पानी की निकासी अवरुद्ध होने और मीडिया के हस्तक्षेप के बाद समस्या का समाधान होने का मामला भी व्यवस्थाओं की निगरानी पर सवाल उठाता है।
दूसरी ओर, यातायात नियंत्रण में पुलिस की सक्रियता और वाहन चालकों द्वारा की गई सराहना आयोजन का सकारात्मक पक्ष रहा।
आस्था के इतने बड़े आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोपरि है। बैठकों में बनाई गई कार्ययोजना का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब संबंधित विभाग और जिम्मेदार एजेंसियां समय पर व्यवस्थाएं लागू करें तथा पर्व के दौरान मौके पर नियमित निगरानी भी सुनिश्चित करें।
अब जरूरत इस बात की है कि सामने आई कमियों की समीक्षा की जाए, जिम्मेदारियां स्पष्ट हों और आगामी धार्मिक आयोजनों में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

