हरदा : शिक्षा के बढ़ते खर्च को लेकर अब विरोध तेज हो गया है। जमना जैसानी फाउंडेशन ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस और महंगी किताबों के खिलाफ जोरदार आवाज उठाते हुए सरकार से तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की है।
फाउंडेशन के सदस्य शांति कुमार जैसानी ने कहा कि आज शिक्षा आम आदमी की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होती जा रही है। निजी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा एडमिशन, वार्षिक शुल्क, एक्टिविटी और ट्रांसपोर्ट के नाम पर अभिभावकों से भारी-भरकम राशि वसूल रहे हैं।
“फीस के साथ महंगी किताबों का बोझ अभिभावकों की कमर तोड़ रहा है।”
— शांति कुमार जैसानी
उन्होंने कहा कि हर वर्ष नई किताबें लागू करने की परंपरा ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। मध्यम और सामान्य वर्ग के परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए कर्ज लेने तक को मजबूर हैं।
जमना जैसानी फाउंडेशन की प्रमुख मांगें:
स्कूल की किताबों के दामों पर सख्त नियंत्रण लागू किया जाए
हर साल किताब बदलने की अनावश्यक परंपरा पर रोक लगे
निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण के लिए कड़े नियम बनाए जाएं
अतिरिक्त शुल्क (एडमिशन, एक्टिविटी, ट्रांसपोर्ट) में पारदर्शिता अनिवार्य हो
स्कूलों में बुक बैंक और सस्ती किताबों की व्यवस्था लागू की जाए
फाउंडेशन ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा एक मूलभूत अधिकार है, इसे मुनाफे का जरिया नहीं बनाया जा सकता।
“अगर समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ, तो शिक्षा केवल अमीरों तक सीमित रह जाएगी।”
फाउंडेशन ने सरकार से अपील की है कि शिक्षा को सुलभ, सस्ती और समान बनाने के लिए तुरंत प्रभावी नीति लागू की जाए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक कारणों से पढ़ाई से वंचित न रहे।

