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बच्चों को सनातन संस्कृति से जोड़ने प्राचीन तिलभांडेश्वर मंदिर में सनातन संस्कार कार्यशाला शुरू

माला और तिलक का महत्व बताया हर रविवार लगेगी सनातन संस्कार की पाठशाला

हरदा / सिराली । जिले में पहली बार बच्चों को धर्म, संस्कृति और सनातन संस्कारों से जोड़ने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की गई है। प्राचीन तिलभांडेश्वर मंदिर परिसर में रविवार से सनातन संस्कार कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस दौरान आचार्य पं. दिनेश शर्मा ने बच्चों को माला में 108 मोतियों के महत्व को बड़े ही सरल तरीके से समझाया।

108 मोतियों की जप माला से भगवान को पुकारते हैं

आचार्य शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार किसी आपात स्थिति में हम तुरंत मदद के लिए 108 नंबर डायल कर एम्बुलेंस बुलाते हैं, ठीक उसी प्रकार 108 मोतियों की माला फेरकर हम भगवान को पुकारते हैं और अपनी बात उन तक पहुंचाते हैं।

उन्होंने बताया कि वैदिक और ज्योतिषीय गणित के अनुसार कुल 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण माने गए हैं। इसलिए जब 27 नक्षत्रों को 4 से गुणा किया जाता है तो संख्या 108 आती है, जो हमारी समृद्ध खगोलीय गणना का प्रत्यक्ष प्रमाण है। मंदिर में प्रवेश और दर्शन के नियमों पर उन्होंने कहा कि मंदिर में प्रवेश करते समय घंटी धीरे से बजानी चाहिए, लेकिन लौटते समय घंटी नहीं बजानी चाहिए।

इसका भाव यह है कि भगवान को अपनी उपस्थिति का एहसास कराएं, लेकिन उनसे आशीर्वाद लेकर चुपचाप बाहर आएं। दर्शन हमेशा भगवान के श्रीचरणों से शुरू कर धीरे-धीरे सिर तक करने चाहिए और पूरी परिक्रमा भगवान के सामने ही करनी चाहिए। महिलाओं के लिए पंचांग प्रणाम का विधान शास्त्रसम्मत माना गया है।

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अब हर रविवार लगेगी सनातन संस्कार पाठशाला

कार्यशाला से जुड़े सोमेश सोनी ने बताया कि आज के समय में अन्य धर्मों की तुलना में हिंदू समाज के बच्चे संस्कृति और सभ्यता भूलते जा रहे हैं। उन्हें वेद, पुराणों के बारे में पता नहीं है। ऐसे में उन्हें अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से यह साप्ताहिक पहल की गई है। इसमें विशेषज्ञों द्वारा बच्चों को जानकारी दी जाएगी।

यह कार्यशाला हर रविवार दोपहर 3 बजे तक प्राचीन तिलभांडेश्वर मंदिर में लगेगी, जहां बच्चों को संस्कार, अनुशासन, बड़ों का सम्मान, धार्मिक परंपराएं और भारतीय संस्कृति के बारे में सरल और रोचक तरीके से बताया जाएगा।

तिलक केवल परंपरा नहीं, पहचान और सुरक्षा कवच

आचार्य शर्मा ने कहा कि सनातन धर्म में पंचतत्वों का पहला स्थान अग्नि का है। मन-शरीर की पवित्रता के लिए बुद्धि शुद्ध होती है और हर व्यक्ति को माथे पर तिलक अवश्य लगाना चाहिए। तिलक हमारी सांस्कृतिक पहचान है। तिलक हमारे शरीर पर ऐसी जगह लगता है जहां आज्ञा चक्र होता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जागृत होता है और स्मरण शक्ति बढ़ती है। उन्होंने बच्चों को बताया कि पूर्वजों की तुलना में माताओं-बहनों को भी प्रतिदिन बिंदी लगानी चाहिए, क्योंकि यह आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक सोच को बढ़ाती है।