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विकास की राह अधूरी, कीचड़ भरे रास्ते से जानें को मजबूर स्कूली बच्चे और ग्रामीण

खातेगांव। मध्य प्रदेश के देवास जिले के खातेगांव तहसील का नेमावर से कुंडगांव खुर्द तक का लगभग 5 किलोमीटर लंबा कच्चा रास्ता आज भी विकास की बाट जोह रहा है। आजादी के इतने वर्षों बाद भी यह मार्ग पक्का नहीं बन सका। नर्मदा परिक्रमा मार्ग का हिस्सा होने के बावजूद, यह रास्ता दलदल का समंदर बन चुका है। बरसात में स्थिति और बदतर हो जाती है—गाड़ियों के पहिए कीचड़ में धंस जाते हैं, स्कूली बच्चे गिर पड़ते हैं, और उनकी यूनिफॉर्म मिट्टी से सन जाती है।

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स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर सरकार ने सड़क पक्की करने के वादे किए, लेकिन हकीकत जस की तस है। रोजाना 25 से अधिक स्कूली बच्चे इस मार्ग से साइकिल या बाइक पर स्कूल जाते हैं, मगर कीचड़ भरा रास्ता उनके लिए सजा बन गया है। कई बार स्कूल पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। किसान भी अपने कृषि यंत्रों को ले जाने के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं, लेकिन हालात उनकी मुश्किलें बढ़ाते हैं। ग्रामीणों का दर्द साफ है, “हमारे बच्चों का भविष्य इस कीचड़ में फंस गया है।” सवाल यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस नेमावर-कुंडगांव खुर्द मार्ग को कब दलदल से निकालकर विकास की पक्की सड़क पर लाएंगे?