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अंगोला में पेट्रोल पर 9 रुपए बढ़ने पर पूरा देश सड़कों पर, मचा बवाल

लुआंडा। तेल से भरपूर अंगोला में महंगाई के खिलाफ उठा जनाक्रोश हिंसक में बदल गया। राजधानी लुआंडा और कई शहरों की सड़कों पर आगजनी, गोलीबारी और लूटपाट ने 22 लोगों की जान चली गई, जिनमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल है। बता दें टैक्सी चालकों ने 1 जुलाई को बढ़े पेट्रोल के दाम के खिलाफ हड़ताल का ऐलान किया था। बुधवार को शहर में सन्नाटा पसरा रहा। सड़कों पर गाड़ियों की जगह सुरक्षा बलों के वाहन थे और दुकानों के बाहर ताले लटके थे। लुआंडा निवासी डैनियल पेड्रो, जो एक बेरोजगार शिक्षक हैं उन्होंने बताया कि सरकार कहती है युवा भविष्य हैं, लेकिन आज ही उनका कोई वजूद नहीं। बेरोजगारी और महंगाई ने हमें असुरक्षित बना दिया है।

सरकार ने ईंधन पर दी जा रही भारी सब्सिडी को घटा दिया है। अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत 300 से बढ़ाकर 400 क्वांजा यानी 29 से 38 रुपए कर दी गई है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सिफारिश पर उठाया गया ताकि स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च बढ़ाया जा सके, लेकिन इसका सीधा असर उन 3.6 करोड़ नागरिकों पर पड़ा, जिनका पहले ही 20 फीसदी मुद्रास्फीति और करीब 30 फीसदी बेरोजगारी से दम घुट रहा है।

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बता दें दक्षिणी शहर लुबैंगो में मंगलवार को 16 साल के किशोर की मौत उस समय हुई जब वह सत्तारूढ़ पार्टी एमपीएलए के कार्यालय पर धावा बोलने वालों में शामिल था। पुलिस की गोली से उसकी जान चली गई। सरकार ने कहा कि हिंसा के पीछे ‘आपराधिक तत्वों’ का हाथ था, जिन्होंने विरोध को सुरक्षा संकट में बदल दिया। दो दिन में 66 दुकानें लूट ली गईं और करीब 200 लोग घायल हुए है और 1200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

विपक्षी पार्टियां और ब्लोको डेमोक्रैटिको ने इसे ‘नीतिगत असंवेदनशीलता’ करार दिया है। 1975 से एमपीएलए के शासन में चल रहे अंगोला को दशकों की तानाशाही और गृहयुद्ध की विरासत झेलनी पड़ी है। अब जब लोग पेट्रोल के बढ़े दामों से जूझते हुए सड़कों पर उतरे, तो उन्हें गोलियों और आंसू गैस का सामना करना पड़ रहा है।