jhankar
ब्रेकिंग
वरिष्ठ अधिवक्ता के घर ऑफिस में मारपीट का आरोप, अधिवक्ता घायल; 7 लोगों पर मामला दर्ज छोटी हरदा के लाल रामविलास हुंडा को मिलेगा के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार हंडिया की दुकानों में बिजली तो भरपूर, पर कनेक्शन का हिसाब कौन बताएगा? गाँव वालों ने किया लाड़ली का भव्य स्वागत: चतरखेड़ा की बेटी अनामिका रघुवंशी बनीं एएसआई , जश्न में डूबा... बानापुरा शराब दुकान में मिलावट का मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा माह के पहले कार्य दिवस की शुरूआत ‘‘वंदेमातरम्’’ गायन से हुई शराब दुकान पर मिलावट वीडियो के बाद हड़कंप, आबकारी विभाग दो दिन से कर रहा जांच 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों के आधार कार्ड बनवाएं आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम के तहत विभिन्न गतिविधियों का हुआ आयोजन अनुसूचित जाति जनजाति संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब की मूर्ति लगाने के लिए एसडीएम को सौंपा ज्...

एक बगिया मां के नाम योजना के तहत महिला बनेंगी सशक्त

भोपाल। मप्र सरकार 15 अगस्त से प्रदेश में एक बगिया मां के नाम योजना शुरू कर रही है। सरकार स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं को सशक्त बनाने के लिए ये परियोजना शुरू कर रही है। इस परियोजना के तहत महिलाएं अपनी जमीन पर फलदार पौधों का बगीचा लगा सकेंगी। इस बगीचे को तैयार करने का पैसा मनरेगा के माध्यम से राज्य सरकार देगी।

दरअसल, मनरेगा ने मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के साथ मिलकर सीपरी नामक एक ऐप बनाया है। यह ऐप कई खूबियों से युक्त है। ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों ने बताया कि यह एक ऐसा ऐप है जो भूमि का चयन खुद ही करता है कि किस भूमि में कौन सा पौधा लगेगा और कब लगेगा। साथ ही पौधे में खाद, पानी और भूमि को कौन से पोषक तत्वों की जरूरत है। यह भी सीपरी ऐप ही सुनिश्चित करेगा।

- Install Android App -

एक बगिया मां के नाम
एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का चयन ऐप के माध्यम से किया जाएगा। जिसमें तीन फिल्टर लगाए गए हैं। जब तीनों प्रक्रियाओं में महिलाएं पास होंगी तो उन्हें योजना का लाभ मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी महिला के नाम पर जमीन होना चाहिए। अगर परिवार के अन्य सदस्य के नाम पर जमीन है तो उनकी सहमति लेनी जरूरी है।

मनरेगा के तहत मिलेगी वित्तीय सहयोग
इसके अलावा जमीन की समग्र आईडी से केवाईसी भी होना अनिवार्य है। योजना के प्रथम चरण में करीब 80000 रुपए का खर्च आएगा। जो महिला हितग्राही को खुद ही वहन करना पड़ेगा। जैसे पौधारोपण के लिए गड्ढे, खाद, फेंसिंग तथा पानी सहित अन्य चीजों की समुचित व्यवस्था हितग्राही को खुद ही करना होगा। इसके बाद उसकी लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। तीन साल के बाद मनरेगा द्वारा उसका भुगतान किया जाएगा। एक हितग्राही के फल उद्यान के लिए करीब सवा लाख रुपए का प्राक्कलन तैयार किया गया है।