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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की पुण्य तिथि पर किया माल्यार्पण एवं पौधारोपण 

 डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के द्वारा रौपित भाजपा का बीज आज वट वृक्ष बनकर सरकार के माध्यम से दुनिया को मानवता का सन्देश दे रहा – राजेश वर्मा 

हरदा। जिला मीडिया प्रभारी दीपक नेमा ने जानकारी देते हुए बताया कि आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की पुण्य तिथि पर भारतीय जनता पार्टी जिला मुख्यालय हरदा के वार्ड 18 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्यान स्थित प्रतिमा पर कार्यकर्ताओं के साथ माल्यार्पण करते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के द्वारा रौपित भाजपा का बीज आज वट वृक्ष बनकर सरकार के माध्यम से दुनिया को मानवता का सन्देश दे रहा , डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। संसद में अपने भाषण में उन्होंनें धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की। अगस्त 1952 में जम्मू कश्मीर की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि ”या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊंगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूंगा”। डॉ. मुखर्जी अपने संकल्प को पूरा करने के लिये 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहां पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 23 जून 1953 को जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी। जेल में उनकी मृत्यु ने देश को हिलाकर रख दिया और परमिट सिस्टम समाप्त हो गया। उन्होंने कश्मीर को लेकर एक नारा दिया था,“नहीं चलेगा एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान” आज केंद्र की सरकार ने उनका ही नही पुरे भारत वासियों का सपना पूरा किया है

 

मनसुख लोहाना ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा 

भारत माता के इस वीर पुत्र का जन्म 6 जुलाई 1901 को एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। इनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी बंगाल में एक शिक्षाविद् और बुद्धिजीवी के रूप में प्रसिद्ध थे। कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक होने के पश्चात श्री मुखर्जी 1923 में सेनेट के सदस्य बने। अपने पिता की मृत्यु के पश्चात, 1924 में उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। 1926 में उन्होंने इंग्लैंड के लिए प्रस्थान किया जहां लिंकन्स इन से 1927 में बैरिस्टर की परीक्षा उत्तीर्ण की। 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त हुए और विश्व का सबसे युवा कुलपति होने का सम्मान प्राप्त किया। श्री मुखर्जी 1938 तक इस पद को सुशोभित करते रहे। अपने कार्यकाल में उन्होंने अनेक रचनात्मक सुधार किये तथा इस दौरान ‘कोर्ट एंड काउंसिल ऑफ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बैंगलोर’ तथा इंटर यूनिवर्सिटी बोर्ड के सक्रिय सदस्य भी रहे।

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कांग्रेस प्रत्याशी और कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि के रूप में उन्हें बंगाल विधान परिषद का सदस्य चुना गया किन्तु कांग्रेस द्वारा विधायिका के बहिष्कार का निर्णय लेने के पश्चात उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। बाद में डॉ. मुखर्जी स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और निर्वाचित हुए।

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अंतरिम सरकार में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में शामिल किया। नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के बीच हुए समझौते के पश्चात 6 अप्रैल 1950 को उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर-संघचालक गुरु गोलवलकर जी से परामर्श लेकर श्री मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को राष्ट्रीय जनसंघ की स्थापना की। 1951-52 के आम चुनावों में राष्ट्रीय जनसंघ के तीन सांसद चुने गए जिनमें एक डॉ. मुखर्जी भी थे। तत्पश्चात उन्होंने संसद के अन्दर 32 लोकसभा और 10 राज्यसभा सांसदों के सहयोग से नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी का गठन किया। डॉ. मुखर्जी भारत की अखंडता और कश्मीर के विलय के दृढ़ समर्थक थे। उन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को भारत के बाल्कनीकरण की संज्ञा दी थी। अनुच्छेद 370 के राष्ट्रघातक प्रावधानों को हटाने के लिए भारतीय जनसंघ ने हिन्दू महासभा और रामराज्य परिषद के साथ सत्याग्रह आरंभ किया। डॉ. मुखर्जी 11 मई 1953 को कुख्यात परमिट सिस्टम का उलंघन करके कश्मीर में प्रवेश करते हुए गिरफ्तार कर लिए गए। गिरफ्तारी के दौरान ही विषम परिस्थितियों में 23 जून, 1953 को उनका स्वर्गवास हो गया।

एक दक्ष राजनीतिज्ञ, विद्वान और स्पष्टवादी के रूप में वे अपने मित्रों और शत्रुओं द्वारा सामान रूप से सम्मानित थे। एक महान देशभक्त और संसद शिष्ट के रूप में भारत उन्हें सम्मान के साथ याद करता है।

इस अवसर पर संचालन महामंत्री पुरषोत्तम झिंझोरे ने किया एवं आभार सौरभ तिवार ने माना

 

कार्यक्रम में जिला महामंत्री देविसिंह सांखला , किसान मोर्चा अध्यक्ष राजेश गोधारा , पूर्व मंडल अध्यक्ष विनोद गुर्जर ,जिला अध्यक्ष राजेश वर्मा, देवीसिंह सांखला,रंग मजूमदार, राजेश गोदरा, विनोद गुजर्र,बसंत राजपूत, कन्हैयालाल कुशवाहा, कुँवरसिंह सानिया,नितिन सोनकर, ठाकुरलाल हुरमाले,नागेंद्र मल्होत्रा, अजय अग्रवाल, सत्यनारायण मीणा, कपिल यादव,शेखर रघुवंशी, उन्नत यादव,विवेक गहलोत,लालू त्रिपाठी, नवीन असरानी उपस्तिथ रहे