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ग्रामीण परंपरागत खेलों को बढ़ावा देती ग्रामीण संस्कृति,बचपन के देशी खेल को बढ़ावा दे रहे पंचायत के गांव!

हर बच्चे और परिवार को मजेदार और सुरक्षित खेल के माहौल में पनपने का मौका दे।

अनिल उपाध्याय  खातेगांव 

आज भी युवाओं को स्थानीय खेलों के नाम सुनकर अपने चेहरे पर खुशियों मुस्कान आ जाती है। आधुनिक मोबाइल की दुनिया में अब बच्चे भी खेलों से दुर होते जा रहे हैं।

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आधुनिक डिजिटल युग में शहरी बच्चों का ज्यादातर समय वीडियो गेम्स के बीच बीतता है। ऐसे में उनसे खो-खो, गिल्ली-डंडा, और पिठु गरम जैसे खेलों के बारे में पूछना नादानी होगी! शहरों में कैरम, वैस, लूडो, ताश, सांप सीढ़ी आदि यह खेल मनोरंजन के साथ साथ दिमाग का विकास मैं सहायता करते है. ऐसे में बचपन के खेल, जो गांव के गलियारों में छूट गए। उन्हें बढ़ावा दे रही है पंचायत एवं सामाजिक कार्यकर्ता आदि जिन्होंने अपनी गर्मियों की छुट्टियों का एक बड़ा हिस्सा इनके नाम किया है। ऐसे में इन खेलों के बारे में जानना भी बचपन की उन यादों में लौटने जैसा है।

खातेगांव ब्लाक के बालहितैषी पंचायत कार्यक्रम के तहत ग्राम निवारदी, आमला, पलासी, रीछी खो, पटरानी, ककड़दी, काकड़कुई, सुलगांव, कालीबाई, पलासी, सुलगांव के अलावा अन्य गांवों में पालकों के साथ मिलकर स्थानीय खेल को बढ़ावा दिया जा रहा है। एक और पालकों की दैनिक दिन चर्या और अजीविका के लिए बड़ो के साथ थोड़ा समय निकालकर बच्चों के साथ सहज रूप से सिखने सीखाने को बढावा दिया जा रहा है। स्थानीय लोक प्रिय खेलों में गिल्ली डंडा, खो खो, गुट्टे किड्ड, छुपन-छुपाई, गिद्ध किटद्र, कंचा, सतोलिया, पिड्डू, गरम, लम्बी कूद, लंगडी टांग, चोर सिपाही, टिक्का, किठ-किठ, चक्का, रप्पा खेल, रस्सी, कस्सीआंख और स्थानीय कहानी, कहावत,पहलियों पर जोर दिया है।

इस काम में निवारदी पंचायत सरपंच, सुभागसिंह ईवने,आमला पंचायत सरपंच वैदमति ईवने सामाजिक कार्यकर्ता योगेश मालवीया और समूह और पालकों के साथ गांव के युवाओं और शाकिर पठान,विजय,आरिफ के सहयोग से गर्मियों में पालको को अपने बच्चों के साथ स्थानीय खेल खेलने को प्रोत्साहित किया जिससे 456परिवार के अभिभावक व 870 बच्चे लाभान्वित हुए। खेल-संसार में जाने हेतु बच्चे स्थानीय खेलों की जानकारी एवं फोटो को व्हाटएप ग्रुप और पालकों से बातचीत कर प्रसार प्रचार किया गया। खेल के दौरान आपसी सहयोग, भाईचारा, समतामूलक भावना, नेतृत्व कौशल के साथ शरीरिक एवं मानसिक विकास के साथ संज्ञानात्मक कौशल बढ़े। शाला प्रांरभ होने के साथ यह अनूठा स्थानीय खेलों का समर कैंप का बच्चों को शाला में प्रवेश कार्यक्रम कर समापन किया। सभी बच्चों व पालकों ने इस कार्य को आगे बढ़ाने की बात कही। सामुदायिक खेल के मैदान बच्चों की प्राकृतिक वृद्धि और विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। संज्ञानात्मक शिक्षा, शारीरिक विकास और सामाजिक विकास समुदाय के लिए खेल के मैदानों के कुछ बेहतरीन लाभ हैं। रोमांचक और आधुनिक खेल के मैदानों के विकल्पों की विशाल श्रृंखला के साथ, अगली पीढी में स्वास्थ्य और खुशी को बढ़ावा देना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। सामुदायिक खेल के मैदानों के विकासात्मक लाभ बच्चों के प्रारंभिक सीखने के विभिन्न चरणों में स्पष्ट दिखाई देता है। ‌

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