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आदिवासी अंचल के स्कूलों के हाल बेहाल बच्चा हर दिन स्कूल का ताला खोल लगाता झाड़ू

टाट पटृटी बिछा अन्य बच्चों के साथ करता पढाई

ग्राम लही, मोरघाट, सिरुपुरा स्कूलों के हाल खराब

मोरघाट स्कूल में ताला मिला बच्चे बाहर खेल रहे थे।

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के के यदुवंशी मकड़ाई समाचार,, सिवनी मालवा।तहसील के आदिवासी अंचलों में शिक्षकों द्वारा बरती जा रही लापरवाही से नौनिहालों का भविष्य अब अंधकार में जाता नजर आ रहा है।आदिवासी अंचलों के अधिकांश स्कूलों के हाल वेहाल है। आदिवासी अंचल ग्राम सामरधा जहां शासकीय शालाओं के बच्चे स्वयं ही अपना भाग्य लिख रहे है।

सामरधा के स्कूल में एक बच्चा हर दिन की तरह आया और अपनी पुस्तक का थैला अपने हाथ से उठाकर नीचे रखा और स्कूल में लगा ताला खोल कर कक्षा की झाड़ू लगाने के बाद टाट पटृटी बिछा आ रहा था अन्य बच्चों के साथ पढाई करने लगा। यह कोई आज की बात नही है अब यह स्कूली जीवन का अनकही कहानी सी बन गई है। सामरधा स्कूल में बारह बजे तक शिक्षक का अता-पता नही था। हद तो तब हो गई जब स्कूल की दीवार पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री आज भी कमलनाथ है तो वही प्रदेश महामहिम राज्यपाल नाम लालजी टंडन अंकित है जब बच्चों से पूछा कि यह किसने बताया तो बच्चों ने दो टूक शब्दों में कहा टीचर ने बताया। ग्रामीणों ने बताया कि टीचर प्रतिदिन 12 बजे के बाद स्कूल आते है और जल्दी ही चले जाते है।
यही हाल ग्राम लही, मोरघाट और सिरुपुरा स्कूलों का मिला जहां 12 बजे तक शिक्षक नही पहुंचे। मोरघाट के एक स्कूल का ताला खुला मिला परन्तु शिक्षक नहीं थे वहीं दूसरे स्कूल में ताला लटका मिला और बच्चे बाहर खेल रहे थे कुछ किताबें खोल बाहर ही पढ़ाई कर रहे थे। इसी प्रकार सिरुपुरा स्कूल में दो शिक्षकों में से एक शिक्षक मिले जो बाहर कुर्सी पर बैठे थे दूसरे 1एक बजे तक नहीं पहुंचे।
कहने को तो स्कूल शिक्षा का मंदिर है लेकिन सरकारी स्कूल में बच्चों के भविष्य के साथ ही खिलवाड हो रहा है। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की अगर माने तो ठोस कारवाई के नाम पर शिक्षकों का वेतन काटे जाने की कारवाई कर खानापूर्ति कर ली जाती है लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। खस्ताहाल शिक्षा व्यवस्थाओं पर जब अधिकारियों से चर्चा की गई। तो उन्होंने कार्यवाही का आश्वासन दिया।

आदिवासी अंचलों की प्रतिभाएं किसी परिचय की मोहताज नही है लेकिन उन्हे तराशने की भूमिका अदा करने वाले ही अपनी जिम्मेदारियों से मुंह छिपा रहे है। बच्चो में पढ़ने की ललक, हौसला और शिक्षा के प्रति समर्पण भी खूब है परन्तु आदिवासी अंचलों में स्कूल चले अभियान, शिक्षा का अधिकार शासन की योजनाओं को शिक्षक पलीता लगा रहे है।
इनका कहना है।
इस सम्बंध में शिक्षा अधिकारी श्याम सिंह रघुवंशी ने बताया कि आदिवासी अंचलों में शिक्षकों द्वारा समय पर नही आने की जानकारी मिली है। अनुपस्थित शिक्षकों पर सख्त कारवाई की जाएगी।
बीआरसीसी संतोष शर्मा ने बताया कि अगर दूरस्थ शालाओं में शिक्षक स्कूल में नही पहुंच रहे है तो यह गलत है कारवाई की जाएगी।