टिमरनी। नगर के गुप्ता भवन में श्रीमद् भागवत कथा में प्रारंभ से पहले पानी की टंकी स्थित शंकर मंदिर से विधि विधान से पूजा पाठ करने पश्चात कथा स्थल तक कलश यात्रा निकाली गई। भागवत कथा के शुभारंभ में पं नीरज महाराज ने कहा कि कथा सदैव धर्म प्रिय होना चाहिऐ। जिसके सुनने से हमारी धर्म के प्रति जागृति वने, मन के लिऐ मोहन की कथा है इसलिऐ मनमोहन की कथा नाम पडा, हमारा जीवन इसलिए दु:खी हो गया कि हम ढंग को छोडकर ढोंग से जीने लगे यहां बोलने का चलने का खाने का लिखने का सवका ढंग है ऐसा भजने का और जीवन जीने का भी ढंग है हमारा साथ यदि पुत्र पैसा और पत्नि नहीं भी दे तो पुण्य भी हमारी और हमारे पितृ देवो को सद्गति देने में सक्षम होता है पुत्रवान वनाना परमांत्मां के हाथ मे है पर पुण्यवान वनना हमारे हाथ मे है खून के रिश्ते से भी बडा है भागवत का रिश्ता गोकर्ण रिश्ते मे धुन्धुकारी का भाई था पर सद्गति भागवत से ही पाई। पितृदेवो की स्मृति मे भागवत कथा भक्त मंडल द्वारा सार्वजनिक रूप से भागवत कथा कलश यात्रा के साथ शुभारंभ की गई। कथा का समय दोप.एक बजे से चार बजे तक रखा गया है। कथा समिति ने सभी भक्तो से कथा सुनने का निवेदन किया।
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