जिंदगी में हर दिन एक नया इम्तिहान लेकर आता है। कभी बारिश का कहर, कभी समाज का शोर, कभी अपने ही लोगों की अलग-अलग राय। ऐसे में अगर हम गुस्से से जवाब देंगे, तो बात और बिगड़ेगी।
याद रखिए, कीचड़ में पत्थर मारोगे तो छींटे खुद पर ही आएंगे। इसलिए जब हालात गर्म हों, तो जुबान को ठंडा रखो।
UP की बाढ़ में भी वही लोग बचे, जिन्होंने घबराकर नहीं, धीरज से काम लिया।
आज का मंत्र बस इतना है – सुनो सबकी, करो वही जो दिल और दिमाग दोनों को सही लगे। राय थोपने से नहीं, राय जोड़ने से समाज बनता है।

