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कृषि विभाग की लापरवाही, नही लिया रासायनिक खाद के सेम्पल, अक्टूबर माह में 50 प्रतिशत हो चुकी बुवाई

वनांचल से लौटकर ग्राउड रिपोर्ट अनिल राजपूत

मकड़ाई समाचार हरदा/सिराली। पहाड़ी क्षेत्रों में आदिवासी किसानों ने गेंहू चने की बोवनी काम शुरू कर दिया गया है। क्योंकि सिंचाई का साधन नही होने से अधिकतर किसान नदी नालों से ही सिंचाई कर लेते है। बाद पहाडी नदिया नालों सुख जाते है। बही निचले क्षेत्र के सामान्य किसान जो नहर ओर कुँए से सिंचाई करते है वे भी खेत तैयार करने में जुट गए हैं। कुछ दिनों में बोवनी शुरू हो जाएगी। किसानों को अमानक या नकली खाद, बीज से नुकसान ना हो इसके लिए सरकार ने कृषि विभाग के अफसर जांच करने के लिए निर्देश दिए है। सरकार के स्पस्ट निर्देष है अधिकारी दुकानों पर जाकर विभिन्न बिंदूओ पर जांच करेंगे, नमूने जुटाए जाएंगे। रिपोर्ट में अमानक खाद, बीज पाया जाता है तो डीलर पर एफआईआर दर्ज होगी। लाइसेंस निरस्त किया जाएगे। पर अब तक खिरकिया विकासखंड के सिराली क्षेत्रों की रासायनिक खाद विक्रताओं की दुकानों की जांच नही कर पाये जिसका खामियाजा पहाड़ी क्षेत्रों के आदिवासी किसनो को भुगत रहे है। जहाँ अक्टूबर माह में 50% गेंहू चने की बुआई हो जाती है। अभी तक रासायनिक खादों की सैंपल नहीं लिए गए हैं ना ही ऐसी कोई योजना है। सरकार का आदेश मात्र कार्यालय तक ही सीमित रह गया है। अब देखना यह होगा कि क्षेत्र बुवाई के बाद खाद बीज का सैंपल लिया जाएगा और उस सैंपल में अगर कोई शक खाद अमानक पाए जाता है तो उसकी भरपाई कैसे कर पाएंगे अधिकारी जब तक जब तक खाद सैंपल ऑफ की रिपोर्ट आएगी तब तक क्षेत्र के आदिवासी किसान की बुवाई लगभग पूर्ण हो जाएगी।

आदिवासी किसानों को बगैर कच्चे बिल ओर शाम 7 के बाद ही मिलता है खाद

सिराली क्षेत्र मैं लगभग आदिवासी पहाड़ी किसानों की भी तादाद ज्यादा है। तथा पढ़े लिखे तथा जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें कच्चे बिल पर ही खाद भेज दिया जाता है। कुछ दुकानों पर अनेक प्रकार के कंपनियों का खाद होने के कारण रेट कम ज्यादा होते हैं। पर उन्हें गिनी चुनी कंपनी का ही रेट पता रहता है। ऐसे में कुछ कंपनियां जो कम रेट पर खाद देती है। उन्हें भी ऊंची कंपनियों के नाम पर बता कर ही बेचा जाता है। जिस का बिल भी नहीं दिया जाता है। आदिवासी किसानों का कहना है कि दुकानदार हमें शाम 7:00 बजे तक बिठा कर रखता है। शाम होने के बाद ही खाद देते हैं, पता नहीं रात में नकली दे रहे हैं या असली इस पर भी सुनने बना है।

डीएपी-यूरिया की जोड़ी के नाम पर आदिवासी किसान गुमराह

क्षेत्र में आदिवासी किसानों सहित अन्य किसानों का कहना है कि किसान को यूरिया तभी दे रहे हैं। जब वह डीएपी ले रहा है, जिसको जोड़ी भी बोल कर दे रहे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीएपी यूरिया की जोड़ी 1500 रुपए में दे रहे हैं। जानकारी के अनुसार तथा कुछ किसानों ने नाम नहीं बताने के कारण यह बताया है कि खाद विक्रेता दिल तो ओरिजिनल पालते हैं। और सही दाम का लेकिन हमें कच्चा बिल दिया जाता है। कभी उन्हीं के पास रख लिया जाता है। किसान ने बताया कि अगर नाम बताता हूं तो वह कल मुझे खाद नहीं देंगे तथा मंडी में भी अनाज का कम भाव लगाते हैं। इसलिए मैं अपना नाम नहीं आने देना चाहता हूं। जब इस बारे में जिला कृषि अधिकारी महेंद्र चंद्रावत से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया आप समझ सकते हैं। अनेक बार किसानों ने भी बोला है कि जब हमें समस्या आती है तो हमने अवगत कराते हैं। लेकिन फोन नहीं उठाते क्या करें आप समझ सकते हैं कि ऐसे अधिकारी किसानों के कितने हितैषी होंगे और बिचौलिए खाद विक्रेताओं के कितने हिमायती होंगे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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पूर्व में हुई जांच के नहीं आए परिणाम

विगत महा खाद की कालाबाजारी को लेकर अखबारों में छपी खबरों को संज्ञान में लेते हुए पूर्व एसडीएम शायमेंद्र जयसवाल ने खाद विक्रेताओं की दुकानों पर पहुंचकर सघन जांच की थी। जिसमें कई प्रकार की अनियमितता सामने आई और पंचनामा बनाकर कलेक्टर महोदय को कार्रवाई के लिए विधिवत मेरे द्वारा जांच प्रतिवेदन एवं पंचनामा दिया गया था। लेकिन राजनीतिक रसूख और सफेदपोश नेताओं के दबाव के कारण एसडीएम खिड़किया को तत्काल अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया। जिसके कारण उस जांच की आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। जिससे खाद विक्रेताओं के हौसले बुलंद हैं क्षेत्र के कृषकों की माने तो खाद नकली बेचा जाता है। जिसका न कोई बिल और ना ही उसका रेट फिक्स है अंधेर नगरी चौपट राजा जैसा ही राज सिराली क्षेत्र के खाद विक्रेताओं में है।

इनका कहना है-

मुझे खाद सैंपल लेने का अधिकार नहीं है, बो डीडीए साहब ही ले सकते हैं, बेही बता सकते हैं क्यों नहीं लिया।
आरबी विश्नोई, कृषि विस्तार अधिकारी सिराली

अभी इस सीजन में खाद के सैम्पल नही लिये है, ले लेंगे।
संजय जैन कृषि विकासखण्ड अधिकारी खिरकिया

मैंने सिराली में जो खाद विक्रेताओं के यहां पर कार्रवाई की थी। विधिवत उसका पंचनामा बनाकर कलेक्टर महोदय को दे दिया था। आगे की कार्रवाई उन्हीं को पता है की कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
शायमेंद्र जयसबाल, पूर्व एसडीएम खिरकिया

जब डीडीए से संपर्क करने की कोशिश की गई तो फोन नहीं उठाया।
एम चंद्रावत जिला कृषि अधिकारी हरदा