पंचायत चुनाव का बहिष्कार : ग्रामीण बोले- रोड नहीं तो, वोट नहीं, वर्षों से सड़क नहीं बनी, तो वोट क्यों दें
केके यदुवंशी मकड़ाई समाचार सिवनी मालवा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा हो चुकी है। तीन चरणों में चुनाव पूरे कराए जाएंगे और इसके लिए प्रशासनिक अमला तैयारियों में जुट चुका है। सिवनी मालवा तहसील के एक गांव के ग्रामीणों ने पंचायत चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर सभी को चौंका दिया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विकास कार्य नहीं हो पा रहे है और ग्राम में पहुँचने के लिए अब तक सीधा पहुँच मार्ग भी नहीं है। तो वह अपने मताधिकार का उपयोग क्यों करें। इसी बीच आम जनता के बीच असंतोष देखने को मिल रहा है। एक ताजा मामला सामने आया है, जहां गांव के लोगों ने अभी से चुनाव के बहिष्कार की घोषणा कर दी है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है, गांव में सड़क और अन्य सुविधाओं का नहीं होना। कई बार आवेदन और निवेदन करने के बाद भी सड़क का निर्माण नहीं होने से गांव के लोग खासे नाराज हैं।
दरअसल होशंगाबाद जिले की सिवनी मालवा तहसील की ग्राम पंचायत तिन्स्या के अंतर्गत आने वाले ग्राम बेरखेड़ी के समस्त ग्रामीण गाँव में एकत्रित हुए। और गांव वालों ने प्रशासन के खिलाफ खूब नारे लगाए। अब की बार सड़क नहीं तो वोट नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि हमेशा जब भी चुनाव आते हैं तभी पार्टी के नेता को हमारी याद आती है। इसके अलावा कोई ध्यान नहीं देता है। जहां आज तक गांव में पक्की सड़क नहीं बन पाई है। साथ ही इलाका प्रधानमंत्री आवास योजना से भी कोसों दूर है। बेरखेड़ी ग्रामीणों का कहना है कि अब की बार पंचायत चुनाव का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
गाँव में एक मात्र मुक्ति धाम बना है जहाँ पैदल जाने के लिए रास्ता तक नहीं है यदि गाँव में किसी की मौत हो जाती है तो अंत्येष्टि के लिए मुक्तिधाम तक जाने के लिए खेत मालिकों से गुहार लगनी पड़ती है तब मुक्तिधाम तक पहुँच पाते है। वही यदि सिवनी मालवा आना हो तो ग्राम भरलाय होते हुए आना पड़ता है जबकि बेरखेडी से सीधा मार्ग भी है जहाँ से सिवनी मालवा पहुंचा जा सकता है। पर उस पर सड़क का निर्माण आज तक नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का दो टूक कहना है की सिर्फ पंचायत चुनाव ही नहीं बल्कि आने वाले सभी चुनावों का ग्रामीणों के द्वारा बहिष्कार किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, हर गांव में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान ठंड के मौसम में भी गर्म है। ऐसे में इस गांव में चुनाव का बहिष्कार होने से चुनाव को लेकर कोई सरगर्मी नहीं रहेगी।

