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मुसलमानों द्वारा खुद का और बच्चों का जन्मदिन मनाया जाना शरीयत के खिलाफ है-मौलाना मुफती असद कासमी

मुसलमानों द्वारा खुद का और बच्चों का जन्मदिन मनाया जाना गलत हैं। यह शरीयत के खिलाफ है इसका जिक्र कुरान और हदीस में कही भी नही मिलता है। देवबंदी उलेमा ने जन्मदिन को मनाना गलत कहा है।
मकड़ाई समाचार उप्र.। जन्मदिन के अवसर पर बहुत से  लोग धूमधाम से मनाते हैं | जिसमें तरह तरह की पार्टी का आयोजन घर और होटलो में करते हैं |जहां पर नाचना, गाना ,,खाना, पीना इस तरह से पार्टी मनाई जाती हैं। इसे गलत करार देते हुए उलेमा ने इसे शरीयत के खिलाफ भी बताया है। उलेमा ने कहा कि मुसलमानों मे जन्मदिन मनाने का कुुरआन और हदीस में जिक्र नही है। उन्होने कहा कि अल्लाह केे रसूल ने भी कभी अपना जन्मदिन नही मनाया। जन्मदिन मनाने की परंपरा तोे ईसाईयों की रही हैं |इससे मुसलमानों को बचना चाहिए।देवबंद के जामिया शेखुल हिंद मदरसा के मोहतमिम मौलाना मुफती असद कासमी ने कहा कि जन्मदिन मनाने का हमारी किसी भी धार्मिक किताब में नही आया है। आज का मुसलमान ईसाईयोें की परंपरा की नकल कर रहा है। मुुसलमानों को जन्मदिन से बचना चाहिए और शरीयत केे अनुुसार चलना चाहिए।मुसलमानों द्वारा खुद का और बच्चों का जन्मदिन मनाया जाना गलत हैं। यह शरीयत के खिलाफ है इसका जिक्र कुरान और हदीस में कही भी नही मिलता है। देवबंदी उलेमा ने जन्मदिन को मनाना गलत कहा है।मुफ्ती असद ने कहा कि जन्मदिन पर मुसलमानों को सोचना चाहिए कि उनकी उम्र से एक साल कम हो गया। इसमें हमने क्या अच्छा किया और क्या बुरा किया। जबकि इसके उलट लोग उम्र का एक साल कम होने पर मोमबत्ती जलाते हैं और केक काटते हैं। यह गलत परंपरा है।