हरदा न्यूज: कांग्रेस द्वारा नपा घेराव का मामला – शास कार्य में बाधा, गैर जमानती मामले में एक महीने में भी नहीं हुई कार्रवाई !
पूर्व विधायक आर के दोगने, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओम पटेल, कांग्रेसनेत्री अवनी बंसल, अमर रोचलानी, गगन बंसल पर हुई थी एफआईआर, दो एफआईआर हुईं !
हरदा । पिछले महीने 8 और 9 जून को नपाध्यक्ष भारती राजू कमेडिया और कार्यालय अधीक्षक आलोक शुक्ला द्वारा कांग्रेस के नपा घेराव के 2 दिन बाद सिविल लाइन थाना में आवेदन देकर शासकीय कार्य मे बाधा व अभद्रता, धक्का मुक्की की शिकायत की गई थी। पुलिस द्वारा इस शिकायत पर पूर्व विधायक आरकेदोगने, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओम पटेल, कांग्रेसनेत्री अवनी बंसल, अमर रोचलानी, गगन बंसल पर एफआईआर दर्ज की थी। धारा 342, 294, 323, 34 में दो प्रकरण दर्ज किए गए ।
एफआईआर के बाद कांग्रेस ने एक आवेदन एसपी को देकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी ।
एफआईआर हुए एक माह गुजरने के बाद भी गैर जमानती धारा में दर्ज मामले में पुलिस द्वारा रसूखदार राजनैतिक नामों पर कोई कार्रवाई नहीं कि गयी है। इधर ,यही अपराध यदि आम नागरिक द्वारा किया गया होता तो उसे भी इतनी मोहलत मिलती ? इस बात की काफी जनचर्चा रही।
एक पखवाड़े पूर्व मकड़ाई एक्सप्रेस ने सिविल लाइन थाना प्रभारी से इस मामले में कार्रवाई को लेकर अपडेट मांगा था। प्रभारी के अनुसार खमलाय डकैती मामले में व्यस्तता बतलाई गयी थी।
मकड़ाई एक्सप्रेस ने आज जब एएसपी से बात की तो उन्होंने अवकाश का जिक्र करते रहे, कल इस मामले की हुई कार्रवाई को दिखवाने की बात कही।
क्या है मामला –
नपाध्यक्ष ने 9 जून को दिए आवेदन में कहा कि 7 जून को दोपहर 1 बजे कर्मचारी देवीदास राठौर मुक्तिधाम की लकड़ी की फाइल साइन कराने चैंबर में आया था। मैं फाइल देखकर साइन करने वाली थी, तभी पूर्व विधायक आरके दोगने, जिलाध्यक्ष ओम पटेल, नेता प्रतिपक्ष अमर चलानी, प्रवक्ता अवनि बंसल, गगन अग्रवाल व अन्य एक राय होकर उनके चैंबर में आए। मटका फोड़ा। अवनि बंसल ने धक्का-मुक्की कर अपशब्दों का उपयोग कर अपमानित किया। मुझे घेर लिया, जिससे मैं डर गई। धारा 342, 294, 323, 34 का केस दर्ज किया। एक अन्य मामले में नपा के कर्मचारी आलोक शुक्ला ने आवेदन दिया। इसमें कहा कि खलासी देवीदास राठौर मुक्तिधाम की लकड़ी की फाइल साइन कराने आया था। वह अध्यक्ष के चैंबर के बाहर खड़ा था, जिससे धक्का मुक्की और नारेबाजी करते हुए हुए उक्त लोग भीतर चले गए। उसे सरकारी काम नहीं करने दिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 353,294,34 दर्ज किया।
इस पूरे घेराव प्रदर्शन कार्यक्रम की जानकारी आयोजक द्वारा सूचना कलेक्टर, एसपी को, थाना कोतवाली के पास थी। मिली जानकारी में घेरावस्थल पर भी पुलिस मौजूद थी। पुलिस की मौजूदगी में घेराव स्थल पर ये घटनाक्रम कैसे हुआ। यदि पुलिस वहां थी तो नपाध्यक्ष के कक्ष में कांग्रेसियों को जाने से क्यों नहीं रोका गया। मौजूद पुलिस क्या कर रही थी ? जनचर्चा में यह बात काफी चली।
— जनचर्चा रही कि कार्यालय अधीक्षक आलोक शुक्ला ने एफआईआर में बताया कि वे काफी भयभीत हो गए थे। भयभीत होने की वजह से मतलब उनको 7 जून के घेराव की शिकायत आवेदन देने में 2 दिन लगे। शासकीय कार्य मे बाधा की एफआईआर तीसरे दिन हुई। ऐसा ही भय नपाध्यक्ष ने भी एफआईआर में व्यक्त किया है जबकि उनके परिजन एवं भाजपाकर्मी व cmo नपाध्यक्ष के कक्ष में ही मौजूद थे। साथ ही मीडिया कर्मी भी वही थे। घेरावस्थल पर पुलिस तो थी ही ।
– मिली जानकारी में आयोजक अधिवक्ता गगन ने cmo को घेराव के पूर्व ही ज्ञापन लेके की सूचना की थी। जनचर्चा में cmo को पहले से ज्ञात जानकारी से बाधा से निपटने का पूरा समय था ।
क्या कहना एडिशनल एसपी का –
“मैं अभी अवकाश पर थी। उस प्रकरण में क्या कार्यवाही अभी तक हुई। कल आकर दिखवाती हूँ। “
राजेश्वरी महोबिया, एएसपी हरदा

