jhankar
ब्रेकिंग
सहायक सचिव पर पूर्व में लग चुके आरोप: मनरेगा खाते से राशि निकालने और धमकी देने का आरोप, कलेक्टर से क... आदेश के बावजूद सहायक ग्रेड-3 को अनुभाग-3 में बनाए रखने पर सवाल, संरक्षण के आरोप विकास के दौर में कीचड़ से गुजरी तिरंगा यात्रा, हंडिया की सड़क ने दिखाई जमीनी हकीकत हरदा जिले की खास खबरों की झलक 18 अगस्त 2026 हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा खिरकिया, कावड़ यात्रियों पर जगह-जगह हुई पुष्पवर्षा पालकी में सवार होकर निकले भोलेनाथ, जयकारों से गूंजा सिराली अमृत-2 योजना में पार्षद प्रतिनिधि दीपक दीक्षित ने लगाया लापरवाही का आरोप   कच्ची सड़कों से त्रस्त गांव वाले, बोले - पक्की सड़क नहीं तो करेंगे चुनाव बहिष्कार ऑपरेशन के बाद भी पत्नी ने दिया बच्चे को जन्म, दिव्यांग पति ने कलेक्टर से मांगी आर्थिक सहायता कलेक्टर हरदा ने तत्कालीन तहसीलदार श्रीमती एक्का पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की ! 13 माह बाद ...

50 साल से उल्कापिंड के खतरे से धरती को बचाने वाला ध्वस्त हो गया

बीते 50सालों से धरती को खतरनाक उल्कापिंडों से बचाकर रखने वाला विशाल रेडियो टेलिस्कोप ढह गया है। इस कारण कई खगोल वैज्ञानकों की आंखों से तो आंसू तक निकल आए। दुनिया की अहम ऑब्जर्वेटरीज में से एक एरेसिबो मंगलवार को पूरी तरह से ढह गया। अमेरिका के कैरेबियन आइलैंड प्योर्टो रीको में लगा यह विशाल रेडियो टेलिस्कोप लंबे समय से जर्जर हालात में था। इस विशाल टेलिस्कोप के ढहने पर मीटियरॉलजिस्ट अदा मोनजन की आंखों से तो आंसू निकल आए। अदा ने कहा कि एरेसिबो को बचाने की सारी कोशिशें की गई थी लेकिन 900 टन का प्लैटफॉर्म 400 फीट नीचे रिफ्लेक्टर डिश पर जा गिरा।

खूबियां एरेसिबो की :-

- Install Android App -

गौरतलब है कि US नेशनल साइंस फाउंडेशन ने पहले ही बता दिया था कि जल्द ही एरेसिबो को बंद कर दिया जाएगा। फाउंडेशन ने बताया है कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ है। एरेसिबो का ऑग्जिलरी केबल अगस्त में क्षतिग्रस्त हो गया था, 1000 फुट चौड़ी रिफ्लेक्टर डिश पर 100 फुट से ज्यादा का कट लग गया था।इसकी वजह से ऊपर लटक रहा प्लैटफॉर्म क्षतिग्रस्त हो गया था। वैज्ञानिक इसे दुनिया का सबसे बड़ा रेडियो टेलिस्कोप मानते थे और इस घटना से विज्ञान जगत सदमे में है। यूनिवर्सिटी ऑफ प्योर्टो रीको में ऐस्ट्रोनॉमर और प्रफेसर कार्मेन पंटोजा ने विज्ञान के लिए सबसे बड़ा नुकसान बताया है।

इस घटना को तूफान बताया वैज्ञानिकों ने :-

एरेसिबो में दशकों तक कई वैज्ञानिक काम कर चुके हैं। इसके जगब काम कर चुके एक वैज्ञानिक डॉ. जोनाथन फ्रीडमेन ने घटना को ‘तूफान’ जैसा बताया। पहले तो ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो। बारिश या बर्फ के तूफान जैसा लगा। वहीं मीटियरॉलजिस्ट डेबोरा मारटोरेल ने घटना पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इसे हादसे को टाला जा सकता था। नौकरशाही ने बैठकर तमाशा देखा और हादसे का इंतजार किया कि NSF प्लैटफॉर्म को ढहाए। उन्होंने कहा कि एरेसिबो विज्ञान जग का रत्न थी।
धरती की आंख :-

धरती की ओर अंतरिक्ष से आने वाले खतरों से आगाह करने वाला एक हथियार कम हो गया है। एरेसिबो को धरती की आंख भी कहा जाता था। ऐसा विशाल और ताकतवर रेडियो टेलिस्कोप था, जिससे वैज्ञानिक विशाल स्पेस रॉक्स को देखते थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब इतनी आसानी से एरेसिबो की जगह कोई नहीं ले पाएगा। इसका रेडार ट्रांसमीटर किसी ऑब्जेक्ट की ओर लाइट भेजता था, जो टकराकर वापस लौटती थी तो इसकी रेडियो डिश इस सिग्नल को पकड़ती थी। इससे वैज्ञानिकों को उल्कापिंडों की स्थिति, आकार और सतह के बारे में जानकारियां मिलती थी।