jhankar
ब्रेकिंग
जिले में पंचायत उप निर्वाचन हेतु संबंधित पंचायतों में 29 सितम्बर को सार्वजनिक अवकाश घोषित पौधारोपण कर वीर भगत सिंह को दी श्रद्धांजलि, युवाओं ने लिया राष्ट्र निर्माण व पर्यावरण संरक्षण का संक... पंधानिया में 2 अक्टूबर को आयोजित होगा अस्पृश्यता निवारण सद्भावना शिविर खुशियों की दास्तां : असिस्टेंट से एंटरप्रेन्योर बने टिमरनी के अर्पित सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ से नागरिकों को मिलेगा शासकीय योजनाओं का लाभ सेवा मेरा योगदान’ अभियान के तहत 2 से 10 अक्टूबर तक होंगे 9 सेवा कार्य आंगन मिलन सेवा अभियान के तहत ‘मेरी कहानी-मेरी सफलता’ लाभार्थी संवाद आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस पर कार्यशाला सम्पन्न उज्जैन सिंहस्थ 2028 रोड चौड़ीकरण विवाद आज का सुविचार - 28 सितंबर 2026

50 साल से उल्कापिंड के खतरे से धरती को बचाने वाला ध्वस्त हो गया

बीते 50सालों से धरती को खतरनाक उल्कापिंडों से बचाकर रखने वाला विशाल रेडियो टेलिस्कोप ढह गया है। इस कारण कई खगोल वैज्ञानकों की आंखों से तो आंसू तक निकल आए। दुनिया की अहम ऑब्जर्वेटरीज में से एक एरेसिबो मंगलवार को पूरी तरह से ढह गया। अमेरिका के कैरेबियन आइलैंड प्योर्टो रीको में लगा यह विशाल रेडियो टेलिस्कोप लंबे समय से जर्जर हालात में था। इस विशाल टेलिस्कोप के ढहने पर मीटियरॉलजिस्ट अदा मोनजन की आंखों से तो आंसू निकल आए। अदा ने कहा कि एरेसिबो को बचाने की सारी कोशिशें की गई थी लेकिन 900 टन का प्लैटफॉर्म 400 फीट नीचे रिफ्लेक्टर डिश पर जा गिरा।

खूबियां एरेसिबो की :-

- Install Android App -

गौरतलब है कि US नेशनल साइंस फाउंडेशन ने पहले ही बता दिया था कि जल्द ही एरेसिबो को बंद कर दिया जाएगा। फाउंडेशन ने बताया है कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ है। एरेसिबो का ऑग्जिलरी केबल अगस्त में क्षतिग्रस्त हो गया था, 1000 फुट चौड़ी रिफ्लेक्टर डिश पर 100 फुट से ज्यादा का कट लग गया था।इसकी वजह से ऊपर लटक रहा प्लैटफॉर्म क्षतिग्रस्त हो गया था। वैज्ञानिक इसे दुनिया का सबसे बड़ा रेडियो टेलिस्कोप मानते थे और इस घटना से विज्ञान जगत सदमे में है। यूनिवर्सिटी ऑफ प्योर्टो रीको में ऐस्ट्रोनॉमर और प्रफेसर कार्मेन पंटोजा ने विज्ञान के लिए सबसे बड़ा नुकसान बताया है।

इस घटना को तूफान बताया वैज्ञानिकों ने :-

एरेसिबो में दशकों तक कई वैज्ञानिक काम कर चुके हैं। इसके जगब काम कर चुके एक वैज्ञानिक डॉ. जोनाथन फ्रीडमेन ने घटना को ‘तूफान’ जैसा बताया। पहले तो ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो। बारिश या बर्फ के तूफान जैसा लगा। वहीं मीटियरॉलजिस्ट डेबोरा मारटोरेल ने घटना पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इसे हादसे को टाला जा सकता था। नौकरशाही ने बैठकर तमाशा देखा और हादसे का इंतजार किया कि NSF प्लैटफॉर्म को ढहाए। उन्होंने कहा कि एरेसिबो विज्ञान जग का रत्न थी।
धरती की आंख :-

धरती की ओर अंतरिक्ष से आने वाले खतरों से आगाह करने वाला एक हथियार कम हो गया है। एरेसिबो को धरती की आंख भी कहा जाता था। ऐसा विशाल और ताकतवर रेडियो टेलिस्कोप था, जिससे वैज्ञानिक विशाल स्पेस रॉक्स को देखते थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब इतनी आसानी से एरेसिबो की जगह कोई नहीं ले पाएगा। इसका रेडार ट्रांसमीटर किसी ऑब्जेक्ट की ओर लाइट भेजता था, जो टकराकर वापस लौटती थी तो इसकी रेडियो डिश इस सिग्नल को पकड़ती थी। इससे वैज्ञानिकों को उल्कापिंडों की स्थिति, आकार और सतह के बारे में जानकारियां मिलती थी।