jhankar
ब्रेकिंग
हरदा में भाजपा कार्यालय के पीछे सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के पास मिला पटाखों का भंडार, पुलिस ने किए ज... आज 18 अक्टूबर 2026 - नवरात्रि का 8वां दिन है, आज माँ महागौरी की पूजा होगी MP में मौसम के दो रंग, हरदा-नर्मदापुरम में तेज धूप तो 21 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट सनातन धर्म में शस्त्र पूजन दशहरे का सबसे मुख्य अनुष्ठान है जात्राखेड़ी में सरकारी ट्यूबवेल से हटाया निजी मोटर का कब्जा, लगाया हैंडपंप सोनलताई में बुजुर्ग ने घर पर फांसी लगाकर दी जान, मजदूरी से लौटे परिजनों ने देखा शव बड़ी खबर : चित्तौड़गढ़ में अवैध पटाखा फैक्ट्री का भंडाफोड़, हरदा से जुड़े तार; 9 आरोपी गिरफ्तार, 2 न... पिनेकल एकेडमी में नवदुर्गा पूजन कर हुआ कन्याभोज, कन्याओं ने किया गरबा नृत्य संपर्क शिविर में राहुल सिंह राजपूत को मात्र 5 रुपये में मिला पंप कनेक्शन विद्युत संबंधी सेवाओं हेतु ‘संपर्क अभियान’ शिविरों का हुआ आयोजन

अमावस्या पर अति आवश्यक है श्राद्ध करना – ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री

चंद्रमा स्वयं देवता तथा पितरों को भी संतुष्ट करते हैं आश्विन मास के अमावस्या श्राद्ध करने से इस लिए अमावस्या पर अति आवश्यक है श्राद्ध करना –

मान्यता है कि आश्विन मास के कृष्णपक्ष में यमराज सभी पितरों को अपने यहां से छोड़ देते हैं, ताकि वे अपनी संतान से श्राद्ध के निमित्त भोजन कर सकें। इस माह में श्राद्ध न करने वालों के अतृप्त पितर उन्हें श्राप देकर पितृलोक चले जाते हैं और आने वाली पीढ़ियों को भारी कष्ट उठाना पड़ता है।

- Install Android App -

गरुड़ पुराण में कहा गया है कि आयु: पुत्रान यश: स्वर्ग कीर्ति पु‌ष्टि बलं श्रियम्, पशून सौख्यं धनं धान्यं प्राप्नुयात् पितृजूननात अर्थात श्राद्ध कर्म करने से संतुष्ट होकर पितर मनुष्यों के लिए आयु, पुत्र, यश, मोक्ष, स्वर्ग कीर्ति,पुष्टि, बल, वैभव, पशुधन, सुख, धन व धान्य वृद्धि का आशीष प्रदान करते हैं।
नाव से नदी पार करने वालों को भी पितरों का तर्पण करना चाहिए। जो तर्पण के महत्व को जानते हैं, वे नाव में बैठने पर एकाग्रचित्त हो अवश्य ही पितरों का जलदान करते हैं। कृष्णपक्ष में जब महीने का आधा समय बीत जाए, उस दिन अर्थात अमावस्या तिथि को श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।
पितरों की भक्ति से मनुष्य को पुष्टि, आयु, वीर्य और धन की प्राप्ति होती है। ब्रह्माजी, पुलस्त्य, वसिष्ठ, पुलह,अंगिरा, क्रतु और महर्षि कश्यप-ये सात ऋषि महान योगेश्वर और पितर माने गए हैं। मरे हुए मनुष्य अपने वंशजों द्वारा पिंडदान पाकर प्रेतत्व के कष्ट से छुटकारा पा जाते हैं।
महाभारत के अनुसार, श्राद्ध में जो तीन पिंडों का विधान है, उनमें से पहला जल में डाल देना चाहिए। दूसरा पिंड श्राद्धकर्ता की पत्नी को खिला देना चाहिए और तीसरे पिंड को अग्नि में छोड़ देना चाहिए, यही श्राद्ध का विधान है। जो इसका पालन करता है उसके पितर सदा प्रसन्नचित्त और संतुष्ट रहते हैं और उसका दिया हुआ दान अक्षय होता है।
1. पहला पिंड जो पानी के भीतर चला जाता है, वह चंद्रमा को तृप्त करता है और चंद्रमा स्वयं देवता तथा पितरों को संतुष्ट करते हैं।
2. इसी प्रकार पत्नी, गुरुजनों की आज्ञा से जो दूसरा पिंड खाती है, उससे प्रसन्न होकर पितर पुत्र की कामना वाले पुरुष को पुत्र प्रदान करते हैं।
3. तीसरा पिंड अग्नि में डाला जाता है, उससे तृप्त होकर पितर मनुष्य की संपूर्ण कामनाएं पूर्ण करते हैं।

ज्योतिष सेवा केन्द्र
ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री
09594318403/09820819501
email.panditatulshastri@gmail.com
www.Jyotishsevakendr.in.net