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‘MP अजब है गजब है’ यह पुलिस का कौन सा चेहरा ? अपहरण का वीडियो वायरल लेकिन पुलिस ने कराया आपसी समझौता,

अपहरण के मामले को पुलिस ने आपसी समझौते से टाला

के के यदुवंशी सिवनी मालवा : पुलिस का मुख्य काम कानून व्यवस्था को बनाए रखना है लेकिन बात अगर नर्मदापुरम की हो तो यहां पुलिस खुद ही जज बन जाती है और अपहरण जैसे गंभीर मामले को आपसी समझौते का रूप देकर खत्म कर दिया जाता है। जहां एक तरफ अपहरण जैसे मामले का वीडियो वायरल होने के बाद भी पुलिस का लापरवाहीपूर्ण रवैये से अपराधियों के हौसले बुलंद होते है।

तहसील से हुआ था अपहरण –

तहसील कार्यालय परिसर में एक युवक को कुछ लोग अपहरण कर ले जाते है लेकिन पुलिस की कार्यशैली कुछ इस तरह रही कि मामले को आपसी समझौते का रूप देकर खात्मा कर दिया गया। गौरतलब है कि बुधवार की दोपहर को सिवनी मालवा तहसील कार्यालय के परिसर जो थाने से लगभग 100 मीटर दूरी पर ही, वहां से चार पहिया वाहन में कुछ लोग आकर आतंक का माहौल बनाकर एक युवक का अपहरण कर फरार हो जाते है। जिसके बाद पगढाल के पास एसएसटी पाइंट पर आरोपियों को पकड़ कर सिवनी मालवा थाने लाया गया था। थाना प्रभारी सिवनी मालवा उषा मरावी का कहना है कि प्रेम प्रसंग का मामला था, दोनो पक्षों में आपसी समझौता हो गया है।

दिन भर क्षेत्र में रहा दहशत का माहौल –

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दिन दहाड़े तहसील कार्यालय से एक युवक के अपहरण की खबर क्षेत्र में फैलते ही र्चाओं का दौर शुरू हो गया। थोड़ी देर बाद जब अपहरण की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। इसके बाद भी पुलिस का रवैया मामले को टालने वाला ही रहा।

इन सवालों का जबाव कौन देगा ?

1. अपहरण जैसे गंभीर मामला दर्ज करने की बजाए समझौता करवाना कौन सी पुलिसिंग है?
2. क्या कोई भी अपराधी इस तरह की वारदात करके आपसी समझौता कर कानून से बच सकता है?
3. थाने से करीब 100 मीटर दूर तहसील कार्यालय में हुई वारदात से पुलिस की लापरवाही का जिम्मेदार कौन?
4. अपहरण ही घटना में आपसी समझौते से अपराधियों में कानूनी व्यवस्था पर उठे सवालों का जबाव कौन देगा?
5. अपहरण की वारदात को अंजाम देने वाले आरोपियों के आपराधिक रिकार्ड की जांच पुलिस द्वारा क्यों नहीं की गई?

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