jhankar
ब्रेकिंग
शराब में मिलावट का वीडियो वायरल, बाबूजी लिकर्स के कर्मचारियों पर आरोप सेवा संकल्प अभियान के तहत परियोजना हरदा के 267 आंगनवाड़ी केन्द्रों पर आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम का हुआ... सेवा संकल्प अभियान के तहत एक दिवसीय स्टार्टअप बूट कैम्प का हुआ आयोजन मदिरा के अवैध विक्रय व संग्रहण के विरूद्ध 6 प्रकरण दर्ज इंटर जनरेशनल बॉन्डिंग एक्टिविटीज से जुड़े युवा पीढ़ी और वरिष्ठजन खुशियों की दास्तां : पीएम स्वनिधि योजना बनी सहारा, हरदा के प्रवीण शर्मा की बदली जिंदगी अधिकारियों ने जनसुनवाई में सुनी नागरिकों की समस्याएं आज का सुविचार - 29 सितंबर 2026 सब्र और समझदारी से बड़ा कोई हथियार नहीं होता वोट चोरी को लेकर कांग्रेस का भोपाल में प्रदर्शन, हरदा में पुतला दहन कल आज कैसा रहेगा मध्यप्रदेश का मौसम किन जिलो को मिली बारिश से मुक्ति और कहां होगी बारिश

12 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द, पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका

भोपाल। मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। प्रदेश के 12 शासकीय नर्सिंग कॉलेज आज भी मान्यता से वंचित हैं। एनएसयूआई का कहना है कि इन कालेजों में शैक्षणिक ढांचे की भारी कमी, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं। राज्य सरकार की गाइडलाइन के बावजूद इन कालेजों ने न तो फैकल्टी नियुक्त की और न ही जरूरी सुविधाएं पूरी कीं। एनएसयूआई ने अगस्त 2025 में इन कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को लेकर शिकायत की थी, लेकिन विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

मंत्री और नेताओं के जिलों में ही कॉलेजों की खराब स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 12 कॉलेजों को मान्यता नहीं मिली उनमें रायसेन, मंदसौर, नरसिंहपुर, जबलपुर, सागर, खंडवा, अमरकंटक, भोपाल, झाबुआ, सीधी, राजगढ़ और दतिया के कॉलेज शामिल हैं। एनएसयूआई का आरोप है कि इनमें से कई कॉलेज कुछ संस्थान केवल एक या दो फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं।राज्य सरकार के 13 मंत्रियों और भाजपा नेताओं के गृह जिलों में हैं, लेकिन वे भी अपने जिलों के कॉलेजों की स्थिति सुधार नहीं पाए।

- Install Android App -

कई कॉलेजों में प्राचार्य और उप प्राचार्य तक नहीं हैं, जबकि कुछ संस्थान केवल एक या दो फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं। एनएसयूआई ने कहा कि कुछ कॉलेजों ने इतनी खामियों के बावजूद एम.एससी. नर्सिंग की 35 सीटों के लिए आवेदन तक कर दिया है, जो नर्सिंग शिक्षा के साथ खिलवाड़ है।

गरीब छात्राओं का भविष्य संकट में
एनएसयूआई ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी लापरवाही के कारण हजारों छात्राओं का भविष्य अधर में है। जो छात्राएं निजी कालेजों की ऊंची फीस भरने में सक्षम नहीं हैं, वे अब प्रवेश से वंचित रह जाएंगी। एनएसयूआई का कहना है कि यह स्थिति कहीं न कहीं प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है। विभाग के कुछ अधिकारी निजी संस्थानों से मिलीभगत कर रहे हैं, जिससे सरकारी कॉलेजों की मान्यता रुकी हुई है। इन कॉलेजों में करीब 1000 से ज्यादा सीटें हैं, जो अब खाली रह जाने का खतरा है।