बैतूल। पत्रकारों के आत्मसम्मान पर हुए हमले को लेकर शनिवार को जिलेभर में आक्रोश देखने को मिला। वरिष्ठ पत्रकार जंकी शाह के साथ कोतवाली थाना प्रभारी सत्यप्रकाश सक्सेना द्वारा की गई कथित धमकी, दुर्व्यवहार और बदसलूकी के विरोध में बैतूल के सभी पत्रकार एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए।
एसपी कार्यालय का घेराव, न्याय की मांग
गुस्से से भरे पत्रकारों ने “न्याय नहीं तो आंदोलन” के नारे लगाते हुए एसपी कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से तत्काल मुलाकात की मांग की, लेकिन अधिकारियों की चुप्पी और निष्क्रियता ने पत्रकारों का रोष और बढ़ा दिया। अब तक इस मामले में किसी भी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
क्या हुआ था 18 अक्टूबर को
घटना 18 अक्टूबर की सुबह की बताई जा रही है, जब वरिष्ठ पत्रकार जंकी शाह एक फटाका प्रकरण में 20,000 रुपये की जप्ती को लेकर कोठीबाजार थाना पहुंचे थे। जंकी शाह ने मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जिस पर थाना प्रभारी सत्यप्रकाश सक्सेना भड़क गए।
आरोप है कि उन्होंने शाह को धारा 151 लगाने की धमकी दी, गाली-गलौज की और उनके सोने की चैन, अंगूठी और 15,000 रुपये जब्त कर लिए। बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम थाने के सीसीटीवी कैमरों में दर्ज है।
RTI ने बढ़ाई नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, पत्रकार जंकी शाह ने इससे पहले RTI के ज़रिए कोतवाली थाना क्षेत्र के पुलिसकर्मियों की नियुक्ति और कार्यप्रणाली से जुड़ी जानकारी मांगी थी। इस कदम से थाना प्रभारी नाराज चल रहे थे, जिसके चलते यह टकराव और गहरा गया।
पत्रकार संगठनों का सख्त रुख
मध्य प्रदेश पत्रकार संगठन ने इस घटना को पत्रकारों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि थाना प्रभारी सत्यप्रकाश सक्सेना पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो पत्रकार भोपाल पुलिस मुख्यालय पर “पत्रकार आत्मसम्मान आंदोलन” करेंगे।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
पत्रकार समाज अब प्रशासन से सीधा सवाल पूछ रहा है —
“क्या पुलिस प्रशासन पत्रकारों के आत्मसम्मान की रक्षा करेगा, या फिर यह मामला भी कागज़ों में दफन कर दिया जाएगा?”
जनता और मीडिया जगत की निगाहें अब बैतूल पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

