धार। धार के किसान के बेटे डॉ. राहुल सिर्वी की रिसर्च की चर्चा ग्लोबल लेवल पर हो रही है। उनकी सफल रिसर्च पर हाल ही में देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी ने पुरस्कार दिया है। डॉ. राहुल सिर्वी ने न्यूक्लियर वेस्ट डिस्पोजल पर रिसर्च की है। इसका उद्देश्य परमाणु कचरे (गैस, तरल, ठोस) को सुरक्षित, प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना है। उनकी इस रिसर्च से परमाणु विकिरण के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।
रिसर्च के दौरान लैब में 12 से 13 घंटे काम
धार जिले के छोटे से गांव खजुरिया में पले बढ़े किसान परिवार के राहुल सिर्वी ने बड़ी उपलब्धि हासिल कर मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है। राहुल सिर्वी ने CSIR-NET-2019 में इंडिया में 115 वीं रैंक पाई थी। इसके बाद उन्होंने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) मुंबई से रिसर्च का काम शुरू किया। उन्होंने पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। वह अब तक अपने नाम 7 अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित करवा चुके हैं।
डॉ. राहुल सिर्वी बताते हैं “शोध के दौरान वह सुबह 7 बजे से लेकर रात 8 बजे तक लैब में काम करते थे। इस दौरान मोबाइल व लैपटॉप से दूरी बनाकर रखी जाती थी। उनकी रिसर्च न्यूक्लियर वेस्ट डिस्पोजल पर थी। इसमें कड़ी मेहनत के बाद जो नतीजा निकलकर आया, उससे परमाणु विकिरण के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।”
राहुल सिर्वी के गांव में दौड़ी खुशी की लहर
डॉ. राहुल सिर्वी को पुरस्कार मिलने की खबर पाते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। पुरस्कार पाकर घर लौटे अपने लाड़ले का गांव वालों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस मौके पर डॉ. राहुल सिर्वी ने बताया “उनकी मेहनत, अनुशासन के अलावा माता-पिता का आशीर्वाद रंग लाया और उनके रिसर्च पर देश के मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी ने पुरस्कार सौंपा। ये पुरस्कार मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का काम करेगा।”
भू-गर्भ शास्त्र के प्रोफेसर हैं डॉ. राहुल सिर्वी
खास बात ये है कि राहुल सामान्य परिवार के हैं. उनकी 10वीं तक पढ़ाई गांव में ही हुई। इसके बाद पढ़ाई के लिए वह इंदौर के शासकीय होलकर विज्ञान महाविद्यालय पहुंचे। उन्होंने भू-गर्भ विज्ञान में डिग्री ली। इसके बाद पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से एमएससी की। वह हमेशा पढ़ाई में अव्वल आते रहे और अब भूगर्भ शास्त्र के कई मामलों में वह रिसर्च करने के साथ ही अध्यापन कार्य भी कर रहे हैं। डॉ. राहुल सिर्वी ने शासकीय होलकर साइंस कॉलेज के भूगर्भ विज्ञान विभाग में दो वर्षों तक फैकल्टी के रूप में सेवाएं दीं। वर्तमान में वह भोपाल के शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय में भूगर्भ विज्ञान विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

