jhankar
ब्रेकिंग
अतिथियों ने पैर पखारकर किया स्वच्छता कर्मियों का सम्मान, दिलाई गई नशामुक्ति की शपथ गांधी जयंती पर खिलाड़ियों ने महात्मा गांधी को श्रद्धा सुमन अर्पित कर किया योग स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत जिला पंचायत परिसर में हुआ श्रमदान बेहतर मृदा स्वास्थ्य के लिए संतुलित मात्रा में करें उर्वरकों का उपयोग जिले की 225 आंगनवाड़ियों में आंगनवाड़ी मिलन कार्यक्रम सम्पन्न हरदा में अवैध प्लॉटिंग पर प्रशासन का बड़ा वार तीन मामलों में FIR, निर्माण हटाने के आदेश पंधानिया में अस्पृश्यता निवारणार्थ जिला स्तरीय सद्भावना शिविर आयोजित हंडिया : आंगन मिलन सेवा में गूंजा सेहत का संदेश, महिलाओं को पोषण और एनीमिया से बचाव की दी जानकारी गांधी जयंती पर भाजपा ने दिया स्वच्छता का संदेश, झाड़ू लेकर मैदान में उतरे कार्यकर्ता वरिष्ठ अधिवक्ता के घर ऑफिस में मारपीट का आरोप, अधिवक्ता घायल; 7 लोगों पर मामला दर्ज

विधानसभा में गलत जानकारी देने पर इंदौर नगर निगम के उपायुक्त सस्पेंड

इंदौर। विधानसभा में गलत जानकारी भेजने के मामले में सरकार ने इंदौर नगर निगम की उपायुक्त लता अग्रवाल को निलंबित कर दिया है. हालांकि जिस जवाब को लेकर कार्रवाई की गई, वह आईएएस अधिकारियों समेत नौ वरिष्ठ अफसरों की टेबल से गुजरने के बाद विधानसभा में भेजा गया था. ऐसे में सिर्फ एक अधिकारी पर कार्रवाई होने से प्रशासनिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं।

सदन में कहा था- शहर में एक भी सफाई निरीक्षक नहीं

- Install Android App -

मामला इंदौर नगर निगम से जुड़े एक सवाल का है, जिसमें विधानसभा में यह जानकारी दी गई कि शहर में एक भी सफाई निरीक्षक (सैनिटरी इंस्पेक्टर) नहीं है. बाद में यह जानकारी गलत पाई गई. इसके बाद सरकार ने जवाब तैयार करने में लापरवाही मानते हुए उपायुक्त को सस्पेंड कर दिया. जानकारी के मुताबिक, विधानसभा में भेजे जाने वाले जवाब की फाइल नगर निगम के कई स्तरों से होकर गुजरती है. इसमें संबंधित शाखा, वरिष्ठ अधिकारी और आईएएस स्तर के अधिकारी भी शामिल रहते हैं. इसके बावजूद कार्रवाई केवल उपायुक्त तक सीमित रहने से पूरे मामले पर चर्चा तेज हो गई है।

‘जिम्मेदारी सामूहिक रूप से तय होनी चाहिए’

सूत्रों के अनुसार, विधानसभा के प्रश्नों के जवाब तैयार करने की प्रक्रिया में हर स्तर पर तथ्यों का परीक्षण होना चाहिए. लेकिन इस मामले में कई स्तरों पर फाइल गुजरने के बावजूद गलती पकड़ में नहीं आई.प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि जवाब कई अधिकारियों की टेबल से होकर गया था तो जिम्मेदारी भी सामूहिक रूप से तय होनी चाहिए. फिलहाल सरकार ने इस मामले में उपायुक्त को निलंबित करते हुए आगे की जांच के संकेत दिए हैं।