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मथुरा में बबाल फरसा बाले बाबा की हत्या

आक्रोशित भीड़ ने किया पथराव,पुलिस ने लाठीचार्ज अश्रुगोले दागे

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 मथुरा 

शहर में प्रसिद्ध गौ-रक्षक चंद्रशेखर जिन्हें लोग श्रद्धा से ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से जानते थे, की शनिवार (21 मार्च, 2026) तड़के एक सड़क हादसे में मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद ब्रज क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है और दिल्ली-आगरा हाईवे पर उग्र प्रदर्शन देखने को मिला।

घटना का विवरण: तड़के 4 बजे का खूनी मंजर

जानकारी के अनुसार, बाबा चंद्रशेखर अपनी टीम के साथ कोसीकलां थाना क्षेत्र के नवीपुर के पास एक संदिग्ध वाहन का पीछा कर रहे थे। बाबा को सूचना मिली थी कि ट्रक में गौ-तस्करी की जा रही है। उन्होंने अपनी बाइक को ट्रक के आगे लगाकर उसे रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक अन्य ट्रक ने उन्हें कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

समर्थकों का आरोप बनाम पुलिस का दावा

घटना के बाद दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं।

समर्थकों का दावा

बाबा के साथियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि हय महज हादसा नहीं बल्कि हत्या है। उनका कहना है कि गौ-तस्करों ने जानबूझकर उन पर ट्रक चढ़ा दिया।

पुलिस का बयान

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मथुरा के एसएसपी (SSP) श्लोक कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह घटना घने कोहरे के कारण हुआ हादसा प्रतीत होती है। पुलिस के मुताबिक, जिस कंटेनर को बाबा ने रोका था उसमें किराने का सामान था, जबकि टक्कर मारने वाला ट्रक राजस्थान नंबर का था जिसमें तार लदे हुए थे।

हाईवे पर बवाल और हिंसा

बाबा की मौत की खबर फैलते ही हजारों की संख्या में लोग दिल्ली-मथुरा हाईवे पर जमा हो गए। भीड़ ने आरोपियों के एनकाउंटर की मांग को लेकर हाईवे जाम कर दिया।

हिंसा

स्थिति तब बिगड़ गई जब भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान 5 से 6 सरकारी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए और कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए।

पुलिस कार्रवाई : भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया संज्ञान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

राष्ट्रपति की मौजूदगी और सुरक्षा

विशेष बात यह है कि जब यह बवाल हो रहा था, उससे करीब 25 किलोमीटर दूर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गोवर्धन में मौजूद थीं। वह वहां गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा और धार्मिक कार्यक्रमों में सम्मिलित होने आई थीं, जिसके कारण प्रशासन पर सुरक्षा का दोहरा दबाव बना रहा।