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मध्य प्रदेश में इस साल मानसून कमजोर रहने के आसार

20 जून के बाद एंट्री, 30-32 इंच बारिश का अनुमान

मानसून पूर्व हो रही बारिश से गर्मी उमस से थोडी़ राहत

मकडा़ई एक्सप्रेस 24 भोपाल । मध्य प्रदेश में इस साल मानसून के कमजोर रहने की आशंका है। मौसम पूर्वानुमानों के अनुसार, प्रदेश में मानसून की एंट्री 20 जून के बाद होने की संभावना है। इस बार राज्य में औसतन 30 से 32 इंच बारिश होने का अनुमान जताया गया है, जो सामान्य से कम है।

क्यों कमजोर रहेगा मानसून….?

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल अल नीनो की स्थितियां मजबूत हो रही हैं। प्रशांत महासागर में जून-जुलाई से अल नीनो के 62% तक पहुंचने की आशंका है, जो अगस्त-सितंबर में 80% तक जा सकती है। अल नीनो के कारण भारत में गर्मी तेज होती है और मानसून कमजोर पड़ता है। इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के न्यूट्रल रहने से भी मानसून को ज्यादा मदद नहीं मिलेगी।

कब और कहां से आएगा मानसून

मानसून के मंडला, सिवनी, डिंडोरी, बालाघाट और अनूपपुर के रास्ते पूर्वी मध्य प्रदेश से एंट्री करने की संभावना है। एंट्री के 5 दिन के भीतर यानी 25 जून तक इसके पूरे प्रदेश में पहुंचने की उम्मीद है। पिछले साल 2024 में मानसून 21 जून को आया था, जो सामान्य तारीख 15 जून से 6 दिन देरी से था।

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किसानों की बढ़ी चिंता

कम बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ेगा। 30-32 इंच बारिश सामान्य औसत 37-38 इंच से कम है। केंद्रीय और उत्तर-पश्चिमी भारत में बारिश की कमी रह सकती है। जून में तो बारिश सामान्य 101% रहने का अनुमान है, लेकिन जुलाई में 95%, अगस्त में 92% और सितंबर में 89% ही रहने की आशंका है। यानी मानसून का दूसरा हिस्सा ज्यादा कमजोर रहेगा।

किन जिलों पर असर ज्यादा

जबलपुर-शहडोल संभाग में सबसे ज्यादा बारिश हो सकती है, लेकिन ग्वालियर, चंबल, इंदौर, उज्जैन और भोपाल संभागों में कोटा पूरा होने में मुश्किल आ सकती है। कम बारिश से खरीफ की फसल और भूजल रिचार्ज दोनों प्रभावित होंगे।

पिछले साल से तुलना

पिछले साल कुछ एजेंसियों ने 38-39 इंच यानी सामान्य से 104-106% बारिश का अनुमान दिया था। लेकिन इस साल का पूर्वानुमान 30-32 इंच का है, जो स्पष्ट रूप से कम है। मौसम विभाग के अनुसार ENSO-न्यूट्रल स्थितियां जून तक रहेंगी, उसके बाद अल नीनो हावी हो जाएगा।

विशेष ध्यान दे

यह पूर्वानुमान विभिन्न मौसम एजेंसियों की शुरुआती रिपोर्ट पर आधारित है। वास्तविक स्थिति बदल भी सकती है। किसानों को सलाह दी जाती है कि मौसम विभाग के अपडेट देखते रहें।