jhankar
ब्रेकिंग
पहले प्रेम विवाह, फिर छिपाया पहली शादी का सच, मौसी के घर से युवती का अपहरण, वीडियो वायरल होने पर पति... सरकारी अनुदान के खाद-बीज की कालाबाजारी का आरोप, सरकारी सील लगी बोरियां मंडी में बिकती मिलीं बिना रेरा और डायवर्शन के कृषि भूमि पर धड़ल्ले से बिक रहे महंगे प्लॉट, प्रशासन मौन! E20 नीति किसानों, युवाओं और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय : अशोक गुर्जर मध्य प्रदेश की 20 बड़ी खबरें | गुरुवार, 9 जुलाई 2026 ,0राजनीति, मौसम, विकास, अपराध और प्रदेश की हर ब... आज का पंचांग एवं राशिफल 🕉️ गुरुवार, 09 जुलाई 2026 9 साल से टापू बना नजरपुरा का मुक्तिधाम, उफनती नदी पार कर शव यात्रा निकालने को मजबूर ग्रामीण पटवारियों का उग्र विरोध: 5 सूत्रीय मांगों पर 7 दिन का अल्टीमेटम, 15 जुलाई से तीन दिवसीय सामूहिक अवका... ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु 9 जुलाई को ग्राम मकड़ाई में लगेगी “सांझ चौपाल” कलेक्टर ने पुल पुलियाओं पर आवागमन की सुरक्षा व्यवस्था देखी

9 साल से टापू बना नजरपुरा का मुक्तिधाम, उफनती नदी पार कर शव यात्रा निकालने को मजबूर ग्रामीण

हरदा/रहटगांव हरदा जिले की रहटगांव तहसील के ग्राम नजरपुरा में प्रशासनिक लापरवाही का एक दर्दनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है। गांव का मुक्तिधाम पिछले करीब 9 वर्षों से टापू बना हुआ है और वहां तक पहुंचने के लिए कोई सुरक्षित मार्ग नहीं है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए शव यात्रा लेकर उफनती अजनाल नदी पार करनी पड़ रही है।

बुधवार को 53 वर्षीय महिला सीमा केवट के निधन के बाद ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर अर्थी को नदी के तेज बहाव से पार कराया और दूसरी ओर स्थित मुक्तिधाम तक पहुंचे। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक उदासीनता की पोल खोल दी है।

44.32 लाख की स्वीकृति, फिर भी नहीं बन रही पुलिया

ग्रामीणों के अनुसार, जनपद पंचायत टिमरनी द्वारा इस पुलिया निर्माण के लिए 44 लाख 32 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के अधिकारियों के अड़ियल रवैये के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।

- Install Android App -

ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी दिन कोई बड़ा हादसा होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिनों के भीतर पुलिया निर्माण को स्वीकृति देकर कार्य शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीणों द्वारा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

वर्षों से शिकायतें, लेकिन समाधान नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। गांव के सरपंच ने बताया कि मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता भी उपलब्ध नहीं है।