सिराली। श्रावण मास के तीसरे सोमवार को सिराली नगर में भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। भगवान भोलेनाथ की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। पालकी में विराजमान विजयमान भोलेनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
शंकर मंदिर से हुई पालकी यात्रा की शुरुआत
पालकी यात्रा की शुरुआत नगर के प्राचीन शंकर मंदिर से हुई। पूजा-अर्चना के बाद भगवान शिव की पालकी को कंधों पर उठाकर यात्रा शुरू की गई। यात्रा के दौरान “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों से पूरा नगर गूंज उठा।
पालकी यात्रा शंकर मंदिर से निकलकर पुराना बस स्टैंड, साईं धाम और गांधी चौक होते हुए नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। रास्ते भर भक्तों ने पालकी पर पुष्पवर्षा की। जगह-जगह आरती की गई और भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की गई।
नगरवासियों ने किया भव्य स्वागत
पालकी के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु चल रहे थे। सड़क के दोनों ओर खड़े नगरवासियों ने पालकी के दर्शन कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। कई जगह आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में पालकी का स्वागत किया। बच्चों में भी यात्रा को लेकर खासा उत्साह देखा गया।
शंकर मंदिर में हुआ समापन और विशेष पूजन
पालकी यात्रा का समापन वापिस आकर शंकर मंदिर पर हुआ। यहां भगवान का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। पुजारियों ने भगवान का रुद्राभिषेक और पंचामृत से स्नान कराया। इसके बाद भक्तों ने बेलपत्र, फूल और प्रसाद चढ़ाकर मनोकामनाएं मांगी।
शाम को तिल भांडेश्वर मंदिर में विशेष संध्याकालीन आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। देर रात तक नगर में भक्ति और धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल सावन के अंतिम सोमवार को निकलने वाली यह पालकी यात्रा सिराली की धार्मिक परंपरा का प्रतीक है।

